
Aao gaon chale: तालाब व छतरियों ने चितावा गांव को एक अलग पहचान
सुवासा. तालेड़ा-केशवरायपाटन मुख्य मार्ग के बीच बसा चितावा गांव करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाता है। गांव के बुजुर्ग 80 वर्षीय गोगालाल मीणा ने बताया कि यह गांव राजपूतों में बसाया था। बाद में खरता भरता मीणा दोनों सगे भाई गांव में रहने लगे। बाद में राजपूतों ने इस गांव को छोड़ दिया। उसके बाद खरता भरता मीणा दोनों भाइयों ने इस गांव को बसाया। एक भ्रांति के चलते इस गांव में राजपूत व मुस्लिम समाज के लोग निवास नहीं करते। यहां 70 प्रतिशत मीणा समाज के लोग निवास करते हैं। बाकी 30 प्रतिशत में अन्य सभी जातियां रहती है।
यह है आकर्षण
अनिल जांगिड़ ने बताया कि गांव में 52 बीघा का प्राचीन तालाब है। जिसमें 12 महीने ही पानी भरा रहता है। बुर्जुगों के अनुसार तालाब में देशी-विदेशी व साइबेरियन पक्षियों का जमावड़ा रहता है। ग्रामीणों के तालाब के चारों तरफ अतिक्रमण के चलते जानवरों को पानी पीने के लिए भी भटकना पड़ रहा है। वहीं तालाब के किनारे कई लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए हैं। जिसके चलते अब पक्षियों का आना कम हो गया है। पास में ही प्राचीन छतरियां है, जो तालाब की सुंदरता को चार चांद लगाती है। देखरेख के अभाव में यह छतरियां खंडहर होती जा रही है। धनराज मीणा ने बताया गांव में प्राचीन चमत्कारी हनुमानजी का मंदिर है, जो 4 बीघा में फैला हुआ है। यहां दूर दराज से श्रद्धालु मंगलवार व शनिवार को दर्शन के लिए आते हैं।
खेती व पशुपालन रोजगार का साधन
गांव की अधिकांश आबादी खेती व पशुपालन के ऊपर निर्भर है। गांव चंबल नदी के पास हेड पर होने से नहरों में पर्याप्त पानी आने से यहां की जमीन काफी उपजाऊ है। गांव में दो नहरों से पानी आता है। किसानों के पास करीब 4000 बीघा का रकबा है। जिसमें किसान गेहूं मक्का, लहसुन, सोयाबीन, अलसी, सरसों की खेती कर अपनी आजीविका चलाते हैं। गांव के अधिकांश लोगों खेती व मजदूरी पर निर्भर है। ब्रह्मानंद मीणा व मुकट मीणा ने बताया कि गांव की साक्षरता की दर 85 से 90 प्रतिशत है। गांव में 1954 से सरकारी स्कूल है। जिसमें वर्तमान में 559 बच्चे अध्ययनरत है। ग्रामवासियों ने ढाई लाख रुपए इक_े कर आधा बीघा जमीन खरीद कर स्कूल को दान कर एक कमरे का निर्माण भी करवाया है। बाद में 2019-20 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत 48 लाख की लागत से छह कमरे बने। भामाशाह द्वारा दी राशि से स्कूल के सभी कमरों में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। यहां का रिजल्ट हर वर्ष 85 से 95 प्रतिशत रहता है।
इन समस्याओं पर हो काम
धनराज प्रजापत ने बताया कि गांव में जिला मुख्यालय पर जाने के लिए रोडवेज बस सुविधा, एसबीआई बैंक, उप स्वास्थ्य केंद्र ग्राम सेवा सहकारी, आंगनबाड़ी, 33 केवी सब ग्रिड स्टेशन बना हुआ है, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व पशु चिकित्सा केंद्र नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए काफी परेशान होना पड़ता है। गांव में 33केवी सब ग्रिड स्टेशन होने के बावजूद किसानों को मात्र 6 घंटे थ्री फेस बिजली मिल पाती है। आनंदीलाल प्रजापति ने बताया कि गांव में 1976 से पानी की टंकी बनी हुई है। जिससे पूरे गांव में पानी की सप्लाई होती है। 2021 में जल जीवन मिशन योजना के तहत 93 लाख की लागत से नई टंकी बन चुकी है। जिससे गांव में पानी की सप्लाई शुरू कर दी है। गांव में 200 घरों में नल कनेक्शन है। दुर्गा लाल मीणा ने बताया कि गांव में ठाकुर जी महाराज के दो मंदिर है। गांव में तेजाजी व भैरुजी की प्रतिमा स्थापित है। तेजा दशमी के दिन हर वर्ष बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। गांव के 75 प्रतिशत सडक़ें पक्की है।
Published on:
14 Feb 2022 12:38 pm
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