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बूंदी पुलिस ने पकड़ा फर्जी राज्यसभा सांसद व उसका साथी

बूंदी पुलिस के शनिवार को पंजाब का फर्जी राज्यसभा सांसद बनकर घूमते एक जना हत्थे चढ़ गया। पकड़े जाने से पहले वह अधिकारियों से मिला और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहा था।

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बूंदी

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pankaj joshi

Dec 12, 2021

बूंदी पुलिस ने पकड़ा फर्जी राज्यसभा सांसद व उसका साथी

बूंदी पुलिस ने पकड़ा फर्जी राज्यसभा सांसद व उसका साथी

बूंदी पुलिस ने पकड़ा फर्जी राज्यसभा सांसद व उसका साथी
स्वयं को बता रहा था राज्यसभा सांसद नरेन्द्र सिंह गिल
सरकारी दफ्तरों में पहुंचकर दिखा रहा था रौब
हिण्डोली में तलाश रहा था जमीन, सर्किट हाउस में रुका
बूंदी. बूंदी पुलिस के शनिवार को पंजाब का फर्जी राज्यसभा सांसद बनकर घूमते एक जना हत्थे चढ़ गया। पकड़े जाने से पहले वह अधिकारियों से मिला और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहा था। कुछ अधिकारियों पर निजी कार्यों को कराने के लिए रौब भी झाड़ चुका। जब शंका हुई तो पुलिस ने पड़ताल कर फर्जी सांसद और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार पुलिस को बूंदी जिला कलक्ट्रेट कार्यालय से सूचना मिली कि एक सफेद रंग की कार से दो जने सरकारी कार्यालयों में घूम रहे हैं। जिनमें से एक जना पंजाब में भाजपा से राज्यसभा सांसद नरेन्द्र सिंह गिल के रूप में परिचय दे रहा। जो कई कर्मचारियों को हुलिये से संदिग्ध लगा। तब पुलिस ने पड़ताल की और फर्जी सांसद बनकर घूम रहे हिमाचल प्रदेश के उना जिला प्रतापनगर निवासी जगजीत सिंह जटसिख व उसके साथी बूंदी के सथूर चुंगी नाका के निकट निवासी रविन्द्र सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया।
थाने पहुंचा तो स्वीकार लिया स्वयं को फर्जी सांसद
फर्जी राज्यसभा सांसद बनकर घूम रहे व्यक्ति को भनक लग गई थी कि उसे पुलिस ने तलाशना शुरू कर दिया, तब वह हिण्डोली से गायब हो गया। पुलिस को बूंदी की टनल के निकट संबंधित कार मिली। कार की तलाशी ली जिसमें बूंदी के बालचंदपाड़ा सथूर नाके के निकट निवासी 55 वर्षीय रविन्द्र सिंह छाबड़ा मिला। छाबड़ा ने पुलिस पूछताछ में खुद के जमीनी विवाद को हल करने के लिए रिश्तेदार हिमाचल प्रदेश के उना जिला प्रतापनगर निवासी जगजीत सिंह जटसिख के सरकारी दफ्तरों में घूमने की जानकारी दी। छाबड़ा ने स्वीकार किया कि जगजीत सिंह ने ही राज्यसभा सांसद बनकर अपना परिचय दिया। तब दोनों को हिरासत में लिया और कोतवाली थाने लेकर आए। पुलिस थाने में पहुंचते ही जगजीत सिंह ने स्वयं ही सारा राज उगल दिया। उसने असली नाम बताते हुए स्वयं को जाली राज्यसभा सांसद स्वीकार कर लिया। पुलिस ने अब पूरे मामले में पूछताछ शुरू कर दी।
साथी का आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस ने साथी रविन्द्र सिंह छाबड़ा को पकड़ा। जिसके खिलाफ कोतवाली थाने में 5 मामले पहले से दर्ज निकले। छाबड़ा के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विद्युत चोरी, लापरवाही से दुर्घटना, लोकसेवक डीटीओ बूंदी की ओर से राजकार्य में बाधा और जानलेवा हमला आदि प्रकरण दर्ज मिले।
लोगों से मिलकर विजिटिंग कार्ड दे रहा था
पुलिस टीम ने सबसे पहले कार को तलाशा। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज लिए। तब पता चला कि बूंदी के सर्किट हाउस में राज्यसभा सांसद बनकर कोई रुका बताया। वह यहां लोगों से मिलकर विजिटिंग कार्ड दे रहा था। विजिटिंग कार्ड पर टैक्सी ड्राइवर सुनील का नम्बर मिला। फिर कार के बारे में जानकारी जुटाई गई। जिससे वाहन मालिक तक पहुंचे, जो हिण्डोली में होने की पुलिस को सूचना लगी।
कलक्टर की सूझबूझ से पकड़ा गया फर्जी सांसद
बूंदी में राज्यसभा सदस्य बनकर घूम रहे शख्स को जिला कलक्टर रेणू जयपाल की सतर्कता से पकड़ा जा सका। वह जिला कलक्टर से मिला। तब उन्हें हावभाव देखकर शक हुआ तो उन्होंने अपने निजी सहायक को पहचान तलाशने को कहा। जिसमें उसकी फर्जी होने की पहचान हुई। फिर निजी सहायक की रिपोर्ट पर पुलिस ने फर्जी सांसद और उसके साथी को पकड़ा।
जिला कलक्टर से मिला, संभागीय आयुक्त के लिए फोन नम्बर
जिला कलक्टर के निजी सहायक पुनीत बिहारी भारद्वाज ने शनिवार को पुलिस को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि 7 दिसम्बर को पंजाब से भाजपा का राज्यसभा सांसद नरेन्द्र सिंह गिल के नाम से एक जना जिला कलक्टर से मिला। कलक्टर से मिलने के बाद निजी सहायक के कक्ष में जाकर रुका। फिर दुबारा परिचय दिया और लौट गया। 8 दिसम्बर को फिर निजी सहायक के पास आया और हिण्डोली में जमीन देखने की जानकारी दी। कोटा संभागीय आयुक्त के मोबाइल नम्बर लिए। इस दौरान आइएएस नवीन महाजन के होशियारपुर में पड़ौसी होने की जानकारी दी। फिर उनके भी मोबाइल नम्बर लिए। इसी बीच जिला कलक्टर ने राज्यसभा सांसद गिल के बारे में जानकारी जुटाने के निजी सहायक को निर्देश दिए। पीए ने इंटरनेट के जरिये जानकारी की, जिसमें नरेन्द्र सिंह गिल नाम का कोई राज्यसभा सांसद नहीं मिला। पूर्व में भी इस नाम का कोई सांसद नहीं मिला। फिर चंडीगढ़ जिला कलक्टर कार्यालय से इनक्वायरी की तो उक्त नाम से सांसद होने से इनकार कर दिया। तब सूचना पुलिस अधीक्षक और थाने में दी। पुलिस ने निजी सहायक की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज कर लिया।