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मिर्च की फसल ने निकाले किसानों के आंसू

आमतौर पर मिर्च ज्यादा खाने से लोगों के आंखों से आंसू निकल जाते हैं, लेकिन इन दिनों मिर्च की पैदावार पर कोरोना का ग्रहण लगने से लगातार गिरते दामों ने क्षेत्र में मिर्च की खेती कर रहे किसानों के आंसू निकाल दिए।

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बूंदी

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pankaj joshi

Apr 28, 2021

मिर्च की फसल ने निकाले किसानों के आंसू

मिर्च की फसल ने निकाले किसानों के आंसू

मिर्च की फसल ने निकाले किसानों के आंसू
किसानों की टूटी कमर, औने पौने दामों में बेचने की मजबूरी
बड़ानयागांव. आमतौर पर मिर्च ज्यादा खाने से लोगों के आंखों से आंसू निकल जाते हैं, लेकिन इन दिनों मिर्च की पैदावार पर कोरोना का ग्रहण लगने से लगातार गिरते दामों ने क्षेत्र में मिर्च की खेती कर रहे किसानों के आंसू निकाल दिए। सब्जी मंडियों में दाम नहीं मिलने से क्षेत्र के किसानों को उपज औने पौने दामों में बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में मिर्ची के फसल की लागत का खर्चा भी नहीं निकलने से क्षेत्र के किसानों को फसल में आर्थिक नुकसान उठाने से किसानों की कमर टूट गई है। क्षेत्र के मांगली कला के किसान नंदकिशोर सैनी, मोहनलाल सैनी, जगदीश सैनी, मांगली खुर्द के शंभू सिंह, हरिराज सिंह व सीताराम सैनी ने बताया कि क्षेत्र में किसानों ने आधुनिक तरीके से मल्चिंग पद्धति के माध्यम व ड्रिप सिस्टम से उन्नत किस्म की मिर्च की पौध लगाकर फसल तैयार की थी। जिसमें इन दिनों बंपर पैदावार हो रही है, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए जन अनुशासन पखवाड़े से बड़े शहरों की सब्जी मंडियों में पैदावार नहीं जाने से मिर्च की खपत कम होने से मंडियों में इन दिनों 3 रुपए से लेकर 5 रुपए प्रति किलो तक के दाम मिल रहे हैं। किसानों ने बताया कि रोजाना सुबह के समय परिवार के सदस्यों के साथ खेतों में मिर्च की पैदावार निकाल कर उनको पॉलीथिन में पैक करने के बाद कोटा, बूंदी, जयपुर की मंडियों में बेचने के लिए भेजा जा रहा है। मिर्ची की फसल को मवेशियों को भी नहीं खिला सकते। ऐसे में रोजाना उपज को निकालकर औने पौने दामों में बेचने की मजबूरी बन गई है। क्षेत्र के बड़ौदिया, सथूर, हरिपुरा, रामी की झोपडिय़ां, बिचड़ी, चेता, ढगारिया, बोरखेड़ा आदि गांवों में भी मिर्च की फसल की जाती है।
मिर्च की फसल की इन दिनों क्षेत्र में अच्छी पैदावार निकल रही है, लेकिन सब्जी मंडियों में खपत कम होने से किसानों को कम दाम मिलने से पैदावार में उनका खर्चा भी नहीं निकल रहा। जिससे किसानों को फसल में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सुरेंद्र कुमार गौतम, कृषि पर्यवेक्षक, गुढ़ाबांध