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सड़कों पर गायों व अन्य पशुओं के जमावड़े के कारण लोगों का चलना हुआ दूभर

शहर की सड़कों सहित हाइवे इन दिनों आवारा मवेशियों के हवाले है। आवारा मवेशियों की बढ़ती तादाद के चलते इन्हें गोशालाओं में रखने की भी ठोर नहीं बची है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Aug 23, 2021

सड़कों पर गायों व अन्य पशुओं के जमावड़े के कारण लोगों का चलना हुआ दूभर

सड़कों पर गायों व अन्य पशुओं के जमावड़े के कारण लोगों का चलना हुआ दूभर

बीच रोड पर बैठे रहते हैं आवारा मवेशी
बूंदी. शहर की सड़कों सहित हाइवे इन दिनों आवारा मवेशियों के हवाले है। आवारा मवेशियों की बढ़ती तादाद के चलते इन्हें गोशालाओं में रखने की भी ठोर नहीं बची है। अकेले बूंदी शहर में करीब ढाई से तीन हजार आवारा पशु घूम रहे हैं। मच्छर-मक्खियों से परेशान गायें बरसात के दिनों में शाम होते ही सूखी जगह की तलाश में हाइवे की ओर रुख करने लगती है। रात को हाइवे व शहर पर इनका जमघट लग जाता है। गांवों से निकल रहे हाइवे पर समूह में गोवंश दिखाई देता है। पशुओं के यह झुंड दुपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। थोड़ी सी चूक उनके लिए जानलेवा साबित हो जाती है। हालांकि कुछ माह पहले नगर परिषद ने अभियान चलाकर गायों को पकडकऱ गोशाला भेजा था, लेकिन कोरोना के चलते अभियान बीच में रोक दिया गया। अब बरसात आने के बाद एक बार फिर से सड़कों पर गायों का झुंड नजर आने लगा है। आए दिन गायों के झुंड बीच सडक़ में लड़ते हुए नजर आते है। इससे सबसे ज्यादा खतरा वाहन चालकों व दुकानदारों को होता है।
हादसों की आशंका
बारिश के कारण पशुओं को मक्खियों के काटने की परेशानी के चलते खेतों में बैठने वाले पशु भी इन दिनों सूखी सड़कों पर बैठने लगते हैं। जिला मुख्यालय पर भी दर्जनों की संख्या में बैल, गाय बैठे नजर आ रहे हैं। इन पशुओं के चलते पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। आने वाले दिनों में भी दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है।
शहर की सड़कों पर रहती हैं 3 हजार गाय
शहर की सड़कों पर ढाई से तीन हजार मवेशी विचरण कर रहे है, जिनके न रहने का ठिकाना है, न खाने-पीने का इंतजाम है। शहर के हर वार्ड में कई गाय झुंड में घूम रही हैं, जो खाने की तलाश में सड़कों, गलियों में भटकती रहती है। हर सड़क पर इसी वजह से जाम लगता है। सडक़ के किनारे और सडक़ पर बैठी गायों को बचाने के प्रयास में सड़क दुर्घटना होती हैं। रात के समय सड़क पर बैठे गोवंश बड़ी सडक़ दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं।
गांवों से भी भगा दिया जाता है
बरसात के दिनों में गांवों में कीचड़ फैल जाता है। जंगल में चरने के लिए जाए तो वहां भी मच्छर व मक्खियों के कारण पशु खड़े नहीं रह पाते। खेतों के पास फसलों की सुरक्षा करने के चलते किसान आवारा पशुओं को पास भी नहीं फटकने देते। पशुओं को एक गांव से दूसरे गांव हांक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में सूखी जगह की तलाश में पशु हाइवे पर आ जाते हैं।
इन जगह गायों का झुंड
शहर के अहिंसा सर्किल, केएन सिंह चौराहा, एक खंभे की छतरी, नैनवां रोड चौराहा, देवपुरा, मीरा गेट आदि स्थानों पर गायों का झुंड सडक़ों के बीचों-बीच नजर आता है।
फिर से शुरू करेंगे अभियान
सड़कों पर मारे-मारे फिर रहे गोवंश
शहर हो या गांव, सभी जगह गोवंश की दुर्दशा हो रही है। इनको कोई धणी धोरी नहीं रहा। यह गोवंश सड़क दुर्घटना का भी शिकार हो रहे हैं। वहीं लोगों को भी इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। गोवंश के सड़कों पर आ जाने से सड़क जाम से लेकर, दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है।
शहर की सड़कों पर झुंड में बैठी गायों को पहले अभियान चलाकर पकडकऱ गोशाला भेजा गया, लेकिन कोरोना के चलते अभियान रोक दिया था। अब एक बार फिर से गोशाला संचालकों से वार्ता कर अभियान शुरू कर आवारा मवेशियों को पास की गोशाला में भेजा जाएगा।
महावीर सिंह सिसोदिया, आयुक्त, नगर परिषद,बूंदी