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दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग व कोटा-दौसा मेगा हाइवे के बीच बसा देईखेड़ा

बूंदी से 85 किलोमीटर दूर लाखेरी उपखंड का देईखेड़ा कस्बा दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग व कोटा दौसा मेगा हाईवे के बीच बसा है। गांव की बसावट करीब 300 वर्ष पुरानी बताई। गांव में प्राचीन लक्ष्मीनाथ का मंदिर बना है। महादेव मंदिर परिसर में 300 वर्ष पुरानी मूर्तियां आज भी विद्यमान हैं। जिनमें से कुछ खंडित हो गई।

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बूंदी

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pankaj joshi

Jul 16, 2021

दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग व कोटा-दौसा मेगा हाइवे के बीच बसा देईखेड़ा

दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग व कोटा-दौसा मेगा हाइवे के बीच बसा देईखेड़ा

दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग व कोटा-दौसा मेगा हाइवे के बीच बसा देईखेड़ा
300 वर्ष पुराना गांव, नहीं बन रहे आवासीय पट्टे
मनीष बैरागी
श्चड्डह्लह्म्द्बद्मड्ड.ष्शद्व
नोताडा. बूंदी से 85 किलोमीटर दूर लाखेरी उपखंड का देईखेड़ा कस्बा दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग व कोटा दौसा मेगा हाईवे के बीच बसा है। गांव की बसावट करीब 300 वर्ष पुरानी बताई। गांव में प्राचीन लक्ष्मीनाथ का मंदिर बना है। महादेव मंदिर परिसर में 300 वर्ष पुरानी मूर्तियां आज भी विद्यमान हैं। जिनमें से कुछ खंडित हो गई।
ग्रामीण दिनेश व्यास ने बताया कि पुरातत्व विभाग इन मूर्तियों को आधार बनाकर इनका पता लगाए तो गांव की स्थापना व पुरातन संस्कृति का पता चलेगा। गांव में अब भी खुदाई के दौरान वर्षों पुरानी वस्तूएं निकलती है। यहां बने प्राचीन महादेव मंदिर में वर्षों से अखण्ड ज्योति जलती है।
यों हुआ नामकरण
75 वर्षीय बुजुर्ग केसरीलाल मीणा, 70 वर्षीय माधोलाल मीणा, अशोक मीना ने बताया कि गांव में बहु संख्यक आबादी मीणा समाज की है, जिसमें पांकल खेड़ा सीसवाली से दो भाई देवा व खेड़ा यहां आकर बसे थे। आज सबसे ज्यादा उनके ही परिवार है।
पांकल परिवार में आज भी उनकी पीढिय़ां चलती आ रही है। दोनो भाइयों के नाम देवा व खेड़ा को जोडकऱ इस गांव का नाम देईखेड़ा रखा बताया जाता है। इधर, क्विदंली के अनुसार देई और खेड़ा अलग-अलग बस्तिया थी जो बदलते समय के साथ मिलकर एक हो गई। नाम देईखेड़ा हो गया।
गांव में ये सुविधा उपलब्ध
गांव में पुलिस थाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, विद्यालय, पानी की टंकी जैसी सुविधाएं उपलब्ध है।
प्राचीन बावड़ी
गांव में प्राचीन बावड़ी है, जिसमें सात दरवाजे और 700 सीढिय़ां हैं। यह चार दशक पहले तक यह बावड़ी पेयजल का प्रमुख स्रोत थी। अब संरक्षण के अभाव में जर्जर हो गई। गांव से कुछ दूरी पर देवनारायण का बाग है, जिसमें करीब तीन-चार सौ पेड़ लगे हैं।
गांव को मिला युवा सरपंच, विकास की उम्मीद
ग्राम पंचायत देईखेडा को इस बार 23 वर्षीय युवा सरपंच राजकुमार मीना मिले। मीना को राजनीति पिता से विरासत में मिली। सरपंच के पिता महावीर मीणा भी इस पंचायत से सरपंच रहकर वर्ष 2005 से 2010 तक बूंदी के जिला
प्रमुख रहे।
गांव की प्रमुख समस्याएं
गांव में 80 लाख रुपये की लागत से करीब एक दशक पहले बनी पानी की टंकी से जलापूर्ति होती थी, लेकिन योजना का संचालन सही नहीं हो रहा।
गांव से क्षेत्र के करीब तीन दर्जन गांव जुड़े हैं ऐसे में उच्च माध्यमिक स्तर का बालिका विद्यालय होना चाहिए।
गांव में सिवायचक जमीनें पर्याप्त मात्रा में नहीं होने से सरकारी भवनों के निर्माण के लिए ठोस नहीं मिल रही।