
4 संतान पहले से होने के कारण नवजात को अस्पताल के बेड पर छोड़ा
4 संतान पहले से होने के कारण नवजात को अस्पताल के बेड पर छोड़ा
आखिरकार 10 दिनों बाद बाल कल्याण समिति ने खोज निकाले दूध मुंहे बालक के माता-पिता
बूंदी. जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती दूध मुंहे बालक के माता-पिता को आखिरकार बाल कल्याण समिति ने 10 दिन बाद ढंूढ़ निकाला। जानकारी में सामने आया कि इनको 108 एंबुलेंस ड्राइवर के नंबर से ट्रेस किया गया। बाद में छपावदा सडक़ किनारे से लेकर बूंदी आए। इस सफलता में अस्पताल के कार्यरत कांस्टेबल भीमराज की सराहनीय भूमिका रही। बताया गया कि माता-पिता मजदूरी करके पेट पालते थे और इनके पहले से संतान होने से यह जन्म हुए बालक का लालन-पोषण नहीं करना चाहते थे, इसलिए नवजात को अस्पताल में भर्ती कराकर बिना बताए बेड पर छोड़ गए। यहीं नहीं टिकिट में अपना नाम पता भी गलत भरवा दिए। जिससे कोई इनको ढूृंढ़ नहीं सके।बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में 25 जून को दूध मुंहे बालक को मालपुर के ढाणी नगर हाल जमीतपुरा निवासी मां ग्यारसी व किशोर उर्फ कल्याण बागरिया उसे लावारिश हाला में भर्ती कराकर छोड़ चले गए। बच्चे का वजन कम व कमजोर होने पर चिकित्सा विभाग ने इसका इलाज शुरू किया, दो दिनों तक नहीं आने पर विभाग ने सम्पर्क किया, लेकिन टिकिट पर दर्ज नम्बर पर कोई सम्पर्क नहीं हो पाया। मामले की जानकारी लगते ही बाल कल्याण समिति अध्यक्ष पोद्दार अस्पताल पहुंची और बालक के बेहतर इलाज के लिए निर्देश दिए।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रही गंभीर
नौ दिनों तक बालक के माता-पिता का कोई अता-पता नहीं मिला। इस पर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ने 108 एंबुलेंस के ड्राइवर से बात कर ग्रामीणों से सम्पर्क कर मजूदरों का पता लगाया। छपावदा निवासी दो युवकों के सहयोग से कांकड़ा बालाजी छपावदा पर बच्चे के माता-पिता के होने की सूचना मिलने पर समिति ने अस्पताल चौकी में तैनात कांस्टेबल को माता-पिता को लाने के निर्देश दिए। इस पर भीमराज उन्हें बूंदी लाया। समिति की अध्यक्ष के साथ सदस्य मीनाक्षी मेवाड़ा, रोहित कुमार, छुट्टन लाल शर्मा व घनश्याम दुबे ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।
Published on:
25 Jun 2021 09:13 pm
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