
हिण्डोली की पाल को हाथियों के पैरों से गुदवाया था, ताकि पाल मजबूत बने,हिण्डोली की पाल को हाथियों के पैरों से गुदवाया था, ताकि पाल मजबूत बने
हिण्डोली की पाल को हाथियों के पैरों से गुदवाया था, ताकि पाल मजबूत बने
हेरिटेज विंडो: सैलानियों का आकर्षण रही रामसागर झील
हिण्डोली. कस्बे में स्थित रामसागर झील बारिश में पर्यटकों के लिए शुरुआत से ही आकर्षण का केंद्र रही। स्टेट टाइम की झील अरावली पर्वतमाला के बीच होने से इसका सौंदर्य देखते ही बन रहा। यहां पर जिलेभर से सैकड़ों की संख्या में सैलानी भ्रमण करने आते रहे।
रियासतकालीन दरी खाना, बारहदरी, घाट, पाल बाग की छटा को सैलानियों को स्टेट टाइम पर खूब भायी। नीचे की तरफ बाग हरियाली की चुनरी ओढ़े रहा। यहा के बुजुर्गों की माने तो बाग में तीन दशक पहले तक दर्जनों पेड़े थे। सूर्य की किरणें जमीन पर नहीं पड़ती थी। यहां पर चंदन, केवड़े के पेड़ों पर बड़े-बड़े सर्प लिपटे देखे गए। झील के बीच स्थित दो टापू पर्यटकों को आकर्षित करते रहे। यहां पर कोटा किशोरसागर की तर्ज पर टापू का सौंदर्यीकरण हो तो झील के चार चांद लगे। यहां पर स्थित क्षारबाग की छतरियां, तेजाजी मंदिर, पांडवकालीन निर्मित शिव मंदिर, डूंगरी वाले बालाजी मंदिर एवं छोटे पुष्कर के नाम से स्थित रघुनाथ घाट की सुंदरता के लोग दीवाने रहे। रघुनाथ घाट पर शाम के समय आज भी बड़ी संख्या में लोग भ्रमण करने से नहीं चूकते। पास ही पहाड़ी पर गढ़ पैलेस रहा जो अब वक्त के थपेड़ों के आगे जर्जर हो गया। गत 3 वर्षों से ग्राम पंचायत ने पालबाग को सुधारने का जिम्मा हाथ में लिया। पाल को प्राचीन अस्तित्व देने के लिए कार्य शुरू हो गया।
इतिहास के पन्नों से...
करीब 2 शताब्दी पहले स्थित एक राम शाह नामक सेठ ने सम्मेलनों की नदी पर छोटी तालाब का निर्माण करवाया था। रामसागर झील का पहले का नाम सम्मेलनों की नदी कहा जाता था। यहां पर छोटी और बड़ी रूंड सहित कई नाले आकर मिलते थे। बाद में बूंदी दरबार रामसिंह ने झील का नाम रामसागर झील रखवाया। विशाल स्वरूप दिया। इतिहासविदों की माने तो बूंदी के राजा ने हिण्डोली की पाल को हाथियों के पैरों से गुदवाया था, ताकि पाल मजबूत बने। यहां की पाल काफी लंबी बनाई। बूंदी के राजाओं ने रामसागर झील में जाने के लिए कस्बे से अलग रास्ता बनाया।
Published on:
09 Aug 2020 06:44 pm
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