
पाली गांव में उपेक्षित है पुरा सम्पदा
पाली गांव में उपेक्षित है पुरा सम्पदा
दुर्लभ एकमुखी दो शिवलिंग स्थापित
बडाखेड़ा. चम्बल नदी किनारे स्थित पाली गांव में ऐतिहासिक पुरा संपदा देखरेख के अभाव में उपेक्षित है। यहां दुर्लभ एकमुखी दो शिवलिंग स्थापित हैं। ये जगह प्राकृतिक सौन्दर्य से सम्पन्न चम्बल नदी ओर मेज नदी के मिलन स्थल से कुछ दूरी पर पर्यटकों को आकर्षित करती है। सार संभाल के अभाव में इन प्राचीन प्रतिमाओं की ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। नदी किनारे स्थापित शिवलिंग गांव को एक हजार वर्ष पहले लेकर जाते हैं, ग्रामीणों के अनुसार पहले गांव मे घना जंगल था। यहां वन्यजीव रहते थे। उस समय लोगों की आवाजाही कम थी। इस कारण प्राचीन धरोहरें सुरक्षित थी। बाद में वन्यजीव व जंगल खत्म होने से प्राचीन धरोहर भी समाप्त होती जा रही हैं। पहले यहां कई शिलालेख थे। कुछ नदी में समा गए, कुछ टूटकर मिट्टी में दब गए। अब कुछ प्रतिमाएं शेष हैं। इन पर ध्यान देने की जरूरत है। पाली गंाव इतिहास के साक्ष्य के लिए कितना भी महत्वपूर्ण हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आजादी के 74 साल बाद भी यहां पक्की सडक़ नही है।
प्राचीन समय में गेहूं की फसल का प्रमुख केन्द्र
बुजुर्ग हरजीराम रेबारी ने बताया कि पाली गांव में प्राचीन समय से ही कटिया ओर बजिया किस्म के गेहूं की पैदावार बड़ी मात्रा में हुआ करती थी। गेहूं का पाली गांव से ही निर्यात किया जाता था। इसके अलावा दूसरे गांवों में मैंने गेहूं की पैदावार नहीं देखी थी।
पाली गांव के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके विकास के लिए राज्य सरकार को अवगत करवाया जाएगा। यहां पर्यटन बढने से रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।
गिरिराज मीणा, सरपंच बसवाड़ा
Published on:
05 Oct 2020 08:21 pm
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