बारिश के पानी में बह गई पुलिया, ग्रामीणों का हुआ आवागमन बंद

बड़ाखेड़ा-सामरा मार्ग पर कस्बे से एक किमी दूरी पर बही के खाळ पर ग्रेवल सड़क पर एक पक्की पुलिया है। जिससे किसान व सामरा गांव के ग्रामीण आवागमन करते है।

By: pankaj joshi

Updated: 22 Jul 2021, 09:24 PM IST

बारिश के पानी में बह गई पुलिया, ग्रामीणों का हुआ आवागमन बंद
बड़ाखेड़ा. बड़ाखेड़ा-सामरा मार्ग पर कस्बे से एक किमी दूरी पर बही के खाळ पर ग्रेवल सड़क पर एक पक्की पुलिया है। जिससे किसान व सामरा गांव के ग्रामीण आवागमन करते है। दो दिन पहले हुई तेज बारिश के चलते पानी की आवक अधिक होने से पुलिया के ऊपर होकर पानी निकल गया। जिससे पुलिया सहित आधी सड़क टूटकर दो अलग-अलग हिस्सों में बंट गई। मिट्टी का कटाव होने से सड़क का एक हिस्सा बह गया। जिससे आवागमन का रास्ता बंद हो गया। सामरा गांव के ग्रामीणों का सड़क सम्पर्क कट गया और पुलिया का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इससे दो ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है। बड़ाखेड़ा के किसानों व सामरा के ग्रामीण अनाज पिसाने के लिए रास्ते का इंतजार कर रहे हैं। दैनिक उपयोग की सामग्री के लिए परिवार का एक सदस्य पैदल चलकर बड़ाखेड़ा जा रहा है।
खेतों में नहीं पहुंच रहे ट्रैक्टर
ग्रामीण रामनारायण, हेमराज, वार्ड पंच देवी शंकर, मांगी लाल, रामदेव आदि ने बताया कि इस समस्या को लेकर सभी को अवगत करवाया, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
बड़ाखेड़ा के किसानों का खेतों में जाने का मार्ग बंद हो चुका है। जिससे किसान खेतों में ट्रैक्टर ले जा कर हंकाई जुताई बुवाई का काम भी अटका हुआ है।
पक्की सडक़ की मांग
सामरा गांव के ग्रामीणों ने मांग की है कि 3 किमी की कच्ची सड़क को पक्का किया जाए। बच्चे पढऩे के विद्यालय जाने पर परेशान न हो। गांव के विद्यालय में आने वाले अध्यापकों को बड़ाखेड़ा से पैदल चलकर आना पड़ता है। तेज बारिश व पानी का बहाव तेज रहता है तो घंटों तक इंतजार करके लौटना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया की सुरक्षा दीवार को लम्बी बनाने पर मिट्टी का कटाव रूक जाएगा ताकि हर साल टूटने का खतरा तो नहीं रहेगा और सुविधा बढ़ जाएगी।
सामरा बड़ाखेड़ा मार्ग पर पडऩे वाली बही के खाल की पुलिया का एक हिस्सा तेज बहाव के साथ टूटकर बह गया। जिसमें सामरा गांव के ग्रामीणों का रास्ता बंद हो गया था। पक्की सड़क के लिए विधायक को अवगत करवाया दिया है, लेकिन स्वीकृति का इंतजार है।
रमेशचन्द पालीवाल, सरपंच, माखीदा
सामरा गांव में बारिश के दिनों में जाने का अनुभव केवल अध्यापक ही बता सकते हैं कि कितनी परेशानी के बाद गांव में पहुंचा जाता है। जूते हाथ में लेकर पैदल चलना पड़ता है। तब जाकर गांव में पहुंच पाते हैं।
नरेन्द्र कुमार, अध्यापक

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