
के. पाटन की बंद शुगर मिल को चालू करने की मांग विधानसभा में गूंजी
के. पाटन की बंद शुगर मिल को चालू करने की मांग विधानसभा में गूंजी
विधायक मेघवाल ने उठाया मुद्दा
कहा : किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार के लिए इसे चालू करें
बूंदी. केशवरायपाटन की बंद पड़ी शुगर मिल को चालू करने की मांग गुरुवार को विधानसभा में गूंजी। विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से यह मुद्दा उठाया।
विधायक मेघवाल ने सदन में कहा की सहकारी शुगर मिल लिमिटेड की स्थापना बूंदी जिले के प्रगतिशील किसान प्रतिनिधियों की ओर से राजस्थान कॉपरेटिव सोसायटिज एक्ट 1965 के तहत सोसायटी का गठन कर 15 नवम्बर 1965 को हुई थी। किसानों के हितों को एवं क्षेत्र के विकास को मध्यनजर रखते हुए उक्त सहकारी शुगर मिल का प्रबंधन वर्ष 1985 में राजस्थान सरकार को दिया गया था। सरकार ने वर्ष 1985 से 2000 तक मिल का प्रबंधन किया। सुचारू रूप से चालू रखकर चीनी का उत्पादन किया जाता रहा। वर्ष 2001 व 2002 में प्रदेश में अकाल पडऩे के कारण क्षेत्र में गन्ने की फसल को सरकार ने चारे के रूप में क्रय कर अकाल क्षेत्र के पशुधन को बचाने के लिए बाहर भेजा। लगातार अकाल पडऩे के कारण गन्ने का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगा, जिसके फलस्वरूप प्रदेश सरकार की ओर से सब केबिनेट कमेठी के निर्णय के अनुसार 22 अप्रेल 2003 को सहकारी शुगर मिल को बंद करने का निर्णय कर लिया।
विधायक ने सदन को बताया कि प्रदेश में अकाल के हालातों के कारण मिल का पिराई सत्र बंद हुआ। अब जब सबकुछ सामान्य हो चुका, बावजूद सरकार मिल को चलाने में रुची नहीं दिखा रही। जबकि किसान लगातार इसे चालू करने की मांग उठा रहे। कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके। अभी भी किसान 10 फरवरी से धरना दे रहे।
इस मामले में उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा ने भी मिल को पीपीपी मोड पर चलाने की सहमति जताई थी। उन्होंने कमेटी बनाकर मिल चलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक किसी प्रकार का कोई निर्णय नहीं किया गया। इससे किसानों में लगातार रोष बढ़ रहा। विधायक मेघवाल ने कहा कि गत दिनों प्रतिनिधि मंडल के साथ संभागीय आयुक्त को भी पत्र सौंपा था। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ सैकड़ों युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए सरकार इसी सत्र में शुगर मिल को चलाने का निर्णय करें।
Published on:
26 Feb 2021 09:01 pm
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