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बूंदी

Video : मनरेगा से हो रहा मोहभंग, फसलों की कटाई में ज्यादा मिल रहा मेहनताना

खेतों में फसलों की कटाई होने से श्रमिकों का महात्मा गांधी मनरेगा योजना से मोहभंग हो रहा है। गांवों में इन दिनों सरसों व गेहूं समेत रबी की फसलों की कटाई व कम्बाइन थ्रेसिंग का काम चल रहा है।

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बूंदी. खेतों में फसलों की कटाई होने से श्रमिकों का महात्मा गांधी मनरेगा योजना से मोहभंग हो रहा है। गांवों में इन दिनों सरसों व गेहूं समेत रबी की फसलों की कटाई व कम्बाइन थ्रेसिंग का काम चल रहा है। श्रमिक कटाई में जुटे हुए है। ऐसे में जिले में नरेगा योजना के काम की गति थम सी गई है। जब से फसलों की कटाई शुरू हुई, तब से मनरेगा से श्रमिकों के पलायन का दौर भी शुरू हो गया। मनरेगा के आंकड़ों में जिले में 184 ग्राम पंचायतों में से 143 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा का कार्य चल रहा है। अन्य 41 ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य प्रभावित हैं। मनरेगा में कार्य के लिए डिमांड नहीं मिलने से मस्टररोल जारी नहीं हो पा रही है। ऐसे में यू कहा जा सकता है कि फावड़े गैती से श्रमिकों का हाथ छूट गया है।

मजदूरों की डिमांड ज्यादा
श्रमिकों की वर्ष में दो बार फसल की कटाई के समय मजदूरों की डिमांड ज्यादा रहती है। इस दौरान फसलों की कटाई में अधिक मजदूरी मिलने से मनरेगा से श्रमिकों का साथ छूट जाता है। इस कारण रबी की फसल की कटाई के समय मनरेगा में श्रमिकों की संख्या ज्यादा कम हो जाती हैं।
यह चल रहे कार्य
मनरेगा के तहत अनुमत कार्यों में से वर्तमान में जिले में डे्रन खुदाई,ग्रेवल सडक़, इंटरलॉङ्क्षकग सडक़, खेल मैदान, पौधारोपण,कचरा संग्रहण केंद्र आरआरसी, कंपोस्ट केंद्र, मॉडल श्मशन विकास, नाला निर्माण आदि कार्य हो रहे है।

अप्रेल से जून रहता है बूम
मनरेगा में अप्रेल से जून तक श्रमिकों की संख्या में बढ़ोतरी रहती है। इन माह में बूंदी जिले में करीब एक लाख के ऊपर श्रमिक मनरेगा से अपने परिवार को लालन-पालन करते है। जबकि अभी मार्च में फसलों की कटाई चलती है,कटाई पूरी होने पर श्रमिकों के द्वारा रोजगार की मांग की जाती है। ऐसे में गर्मियों के दिनों में मनरेगा कार्यों में श्रमिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है।