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Video : नौनिहालों की सांसों पर संकट, अस्पताल में नहीं शिशु रोग विशेषज्ञ

उपजिला चिकित्सालय में नौनिहालों के उपचार की सुविधा के लिए 25 लाख की लागत से निर्मित बीस बेड की क्षमता वाले शिशु रोग यूनिट पर भी ताला लटका हुआ है।

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नैनवां. उपजिला चिकित्सालय में नौनिहालों के उपचार की सुविधा के लिए 25 लाख की लागत से निर्मित बीस बेड की क्षमता वाले शिशु रोग यूनिट पर भी ताला लटका हुआ है। शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से 25 लाख की लागत से बने शिशु रोग यूनिट बंद पड़ी है। चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत होने से चिकित्सा विभाग ने साथ ही शिशु रोग इकाई शुरू की गई थी।


चिकित्सा विभाग के सूत्रों ने बताया कि कोविड-19 के सैकण्ड फेज के बजट में चिकित्सालय में बीस बेड के शिशु वार्ड की स्थापना हुई थी। विभाग ने शिशु रोग यूनिट संचालन के लिए बीस बेड के वार्ड के निर्माण की स्वीकृति जारी करने के साथ ही 25 लाख रूपए का बजट भी स्वीकृत किया था। वार्ड का निर्माण चिकित्सालय भवन से कनेक्ट रखते हुए तैयार भी हो चुका। शिशु रोग वार्ड एरिया के लिए निर्माण 68.6 फीट की लम्बाई व 18.6 की चौड़ाई में निर्माण कराया था, जिसमें बीस बेड स्थापित करने के लिए वार्ड की लम्बाई 59 फीट व चौड़ाई 18 फीट है। शेष में वार्ड में शौचालय, टॉयलेट व स्नानाघर का निर्माण हो रहा है।इसके साथ वार्ड स्टोर व एनएस स्टेशन भी स्थापित हो रहा है।

चार तहसीलों बच्चों का उपचार केंद्र
जिला मुख्यालय के बाद जिले में नैनवां उपजिला चिकित्सालय सबसे बड़ी शिशु रोग उपचार यूनिट स्थापित है। उपखंड मुख्यालय होने के साथ ही नैनवां उपखंड के डेढ सौ से अधिक गांवों के साथ टोंकजिले के उनियारा, दूनी और नगरफोर्ट के तीन दर्जन से गांवों का भी
नैनवां से जुडाव है। इन तहसीलों के गांवों से भी उपचार के लिए नैनवां उपजिला चिकित्सालय में ही आते है। शिशु रोग यूनिट शुरू हो तो चारों तहसीलों के गांवों के नोनिहालों को उपचार की सुविधा मिलना शुरू हो जाए।

विशेषज्ञ नियुक्त नहीं
उपजिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ समदरलाल मीणा का कहना है कि शिशुरोग विशेषज्ञ नियुक्त नहीं होने से यूनिट बंद पड़ी है।