
बाणगंगा के प्राकृतिक सौन्दर्य व वन्यजीवों से रूबरू होंगे पर्यटक
बाणगंगा के प्राकृतिक सौन्दर्य व वन्यजीवों से रूबरू होंगे पर्यटक
बूंदी. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन भीमलत वन क्षेत्र में बाणगंगा नदी के उद्गम स्थल का प्राकृतिक सौंदर्य काफी समृद्ध व लोगों को आर्षित करने वाला है।
यहां पहुंचने के रास्ते नहीं होने से लोग अब तक इस रमणीक स्थल से अनजान बने हुए हैं। वन विभाग ने भीमलत वन क्षेत्र में लव-कुश वाटिका के साथ इस क्षेत्र को भी विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। यहां बहने वाली बाणगंगा नदी के उद्गम स्थल तक रास्ता बनाने का काम चल रहा है तथा शीघ्र ही किनारों पर भी रास्ते बनाकर यहां तक पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने की योजना है।
जिले में तीन जगहों पर सफारी शुरू करने की स्वीकृति मिली थी। जिनमें यह क्षेत्र भी शामिल है। भीमलत नाले के दोनों किनारों पर रास्ते बनाने का काम पूरा हो गया हैं। यह प्राकृतिक पर्यटक स्थल टाइगर रिजर्व की भोपतपुरा रेंज में आता है, जो नदी किनारे अर्जुन पेड़ों की अधिकता से भीषण गर्मी में भी शीतलता प्रदान करता है। यहां भालू, पेंथर, भेडिय़ा, नीलगाय सहित वन्यजीवों की कई प्रजातियां मौजूद है।
रोमांच बढ़ा
भीमलत वन क्षेत्र में मुंडेर,भालाकुई व बाणगंगा के जंगलों में अच्छे घास के मैदान है। जहां मानवीय गतिविधियां बहुत कम है। टाइगर रिजर्व के इस बफर क्षेत्र में बहने वाली बाणगंगा व मांगली बारहमासी नदियां और मंडोल, भीमलत व अभयपुरा बांध बाघों के फिर से आबाद हो सकते है। इस क्षेत्र में जिले से लुप्तप्राय: भेडिय़ों का दिखाई देना अच्छा संकेत। इसके अलावा यहां गीदड़, चिंकारा, जंगली सूअर, रोझ आदि भी अच्छी तादात में मौजूद है।
जंगल में दिखने लगे वन्यजीव
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की शुरूआत 2022 में राजस्थान के बूंदी जिले में बाघों के जच्चाघर के रूप में पहुंचाने जाने वाले बाघों के आश्रय स्थल को फिर से अनुकूल बनाने के लिए की गई थी। टाइगर रिजर्व बनने के बाद कोर के साथ-साथ बफर क्षेत्र भी बाघों के अनुकूल बनने लगा है। बफर जोन में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढऩा रामगढ़ के साथ-साथ मुकुन्दरा व रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के लिए भी शुभ संकेत है।
भीमलत व उपरमाल के पठार बनेंगे इको टूरिज्म के नए केंद्र
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बूंदी-चित्तौड़ मार्ग स्थित दक्षिण-पश्चिमी छोर पर एक घास का मैदान व झाड़ीदार पठार है, जो मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से जुड़ता है। यह घास का मैदान व झाड़ीदार क्षेत्र स्थानीय रूप से उपरमाल के पठार के नाम से जाना जाता है। यह राजस्थान के बड़े हाड़ौती या दक्षिणपूर्वी पठार का हिस्सा है। भीलवाड़ा व बूंदी जिले का यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व के कोर प्रशासन के नियंत्रण में तथा वर्तमान में यहां रास्ते बनाकर सुरक्षा बढ़ाने से वन्यजीवों की गतिविधियां देखी जा सकती है। विभाग जल्दी ही यहां जंगल सफारी भी शुरू करने जा रहा है।
भीमलत वनक्षेत्र में बाणगंगा नदी व मुंदेड़ के पठार पर रास्ते बनाने का काम चल रहा है तथा भीमलत नाले के दोनों तरफ का काम पूरा हो गया है। यहां पर वन चौकी बनाने का काम भी होगा।
हरिसिंह हाड़ा, सहायक वन संरक्षक, रामगढ़ विषधारी (कोर),बूंदी
Published on:
22 Mar 2024 06:17 pm
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