भाजपा सरकार से सहकारी चीनी मिल संचालन की उम्मीद-video
केशवरायपाटन. प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद फिर से लोगों को सहकारी चीनी मिल के संचालन किए जाने की आस जगी है। भाजपा प्रत्याशी चंद्रकांता मेघवाल व कांग्रेस प्रत्याशी सीएल प्रेमी ने चुनाव में मिल चलाने का वादा किया था, लेकिन यहां चुनाव परिणाम प्रदेश में भाजपा को मिले बहुमत से विपरीत आने से अब मिल संचालित करने में संशय उत्पन्न हो गया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने जा रही, जबकि यहां कांग्रेस का विधायक विजयी हुआ है। पिछले बीस सालों से भाजपा व कांग्रेस का शासन रहा, लेकिन दोनों ही दलों की सरकारों ने मिल की फाइल का निस्तारण नहीं किया। मिल चलाने के लिए किसानों ने आंदोलन किया।
आंदोलन के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मिल के मामले को लेकर सकारात्मक पहल कर किसानों व सहकारिता विभाग को एक टेबल पर बैठा दिया, लेकिन चुनाव आते ही वह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। चुनाव के बाद सत्ता बदल गई। अब किसान नई सत्ता की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। राज्य सरकार ने 1965 में सोसायटी का गठन कर सहकारी चीनी शुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की थी। मिल ने 1969-70 में गन्ना पेराई शुरू की लेकिन मुख्य अशोक गहलोत ने वर्ष 2020 में मिल को बंद कर दिया।
किसानों का हिसाब बाकी
मिल बंद करने के बाद इसकी सम्पत्ति पर भी ग्रहण लग गया। मिल के लिए गठित सोसायटी में राज्य सरकार की हिस्सा राशि 86 प्रतिशत व किसानों की 14 प्रतिशत थी। सरकार ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर नियुक्त कर मिल का संचालन शुरू किया तो क्षेत्र में किसानों ने गन्ने की फसलें करना शुरू किया। गन्ना उत्पादक किसानों को मिलकर शेयर बेचकर भागीदारी दी। मिल बंद होने तक मिल के पास 4300 शेयर होल्डर थे। मिल के पास इनके अभी तक 1करोड 25 लाख रुपए शेयर जमा है। मिल बंद होने पर देनदारियां चुका दी गई, लेकिन फिर भी शेयर होल्डर का हिसाब नहीं हो पाया। मिल के पास वर्ष 2022 तक किसानों के शेयरों की 56 लाख 72 हजार 750 रुपए व 65 लाख 77 हजार 630 रुपए डेड राशि जमा है। मिल में 4338 कृषक सदस्यों में 131 कृषक सदस्य अपनी हिस्सेदारी वापसी ले चुके हैं। 4207 शेयर धारक किसानों के पास 250 रुपए वाले 8345 व 500 रुपए वाले 7173 शेयर है।
अतिक्रमण कर बना लिए मकान
करोड़ों के मालिक सहकारी चीनी मिल के पास स्थापना के समय 636 बीघा से भी अधिक जमीन थी। इस जमीन को मिल प्रशासन नहीं संभाल पाया। मिल भूमि पर लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए, जिनको मुक्त नहीं करवा पाए। सरकारी कार्यालय बन गए व सड़कें निकलने के बाद 636 बीघा जमीन घाटे में चल रही मिल के लिए वरदान साबित हुई। राज्य सरकार ने देनदारियों चुकाने के लिए 458 बीघा जमीन 56 करोड़ में जयपुर विद्युत प्रसारण निगम को बेचकर देनदारियों चुकाई। अभी उसके खाते में 136 बीघा जमीन ही रह गई है। अन्य जमीन खुर्द हो चुकी है। देनदारियां चुकाने के बाद शेष रही राशि को मिल प्रशासन ने एफडी करवाई वह एफडी अब 49 करोड़ की हो चुकी है।
करोड़ों रुपए की सम्पत्ति हुई बेकार
सिंचित क्षेत्र में स्थित सहकारी चीनी मिल की स्थापना के साथ ही परिसर में मिल कर्मचारियों अधिकारियों के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर आवास बनाए गए। अधिकारियों के लिए विश्रामगृह निर्माण करवाया। किसानों के लिए केंटिन निर्माण करवाए। मिल बंद होने के बाद इनके ग्रहण लग गया। लाखों रुपए की लागत का विश्राम गृह जर्जर हो गया।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया। अब नई सरकार के गठन के बाद किसानों का प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मिलकर बधाई देकर मिल की समस्या रखेंगे। सरकार तैयार नहीं होगी तो आंदोलन को गति दी जाएगी। मिल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने वाला है।
दशरथ कुमार शर्मा संभागीय महामंत्री, हाड़ौती किसान यूनियन कोटा
सहकारी चीनी मिल को चलाने के लिए पहले भी प्रयास मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मिल कर किए थे। किसानों के साथ मिल की फाइल पर सहकारिता विभाग ने चर्चा शुरू कर दी थी, लेकिन चुनाव आने से मामला रुक गया। अब सरकार बदल गई तो इस मामले को नव निर्वाचित मुख्यमंत्री के सामने रख कर मिल चलाने की मांग की जाएगी। आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन किया जाएगा।
सीएल प्रेमी, नव निर्वाचित विधायक केशवरायपाटन