अतिक्रमण से सिकुड़ गया चार बीघा में फैला नैनवां बस स्टैंड-video
नैनवां. शहर का बस स्टैंड अतिक्रमण की चपेट में है। चार बीघा वर्ग क्षेत्रफल में स्थित बस स्टैंड का एक भी कोना ऐसा नहीं है जो अतिक्रमण की चपेट में नहीं हो। अतिक्रमण की स्थिति यह बनी हुई है कि कई बार तो बसों को खड़ा करने तक कि ठौर नहीं मिल पाती। आधे बस स्टैंड पर टैक्सियों का अतिक्रमण तो आधे पर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। थोड़ी बहुत जगह बचती है उस पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है।
सब्जी मंडी बनाई, काम नहीं आई
बस स्टैंड के पूरे परिसर में जगह-जगह सब्जी व फल विक्रेताओं के ठेले लगे पड़े है। सब्जी व फल वालो की तरह ही अन्य सामान बेचने वालों ने भी अपने ठेले लगा लिए। कई बार तो बस स्टैंड का प्लेटफार्म ही ठेलों से अट जाता है, जिससे बसों को निकलने का रास्ता तक नहीं मिलता। सब्जी व फल विके्रताओं द्वारा ठेले लगाने से बस स्टैंड छोटा पडऩे लगा तो नगरपालिका ने पास स्थित सुभाष पार्क को उजाडकऱ वहां पर लाखों रुपए खर्च कर सब्जी मंडी बनाकर भी विक्रेताओं को सब्जीमंडी में नहीं भेज पाए। जबकि पार्क की जगह बनाई सब्जीमंडी में प्लेटफार्म, टीनशेड, चार दिवारी सहित सभी सुविधाओं की स्थापना कर रखी है।
ऐसे सिकुड़ता गया
बस स्टैंड का निर्माण हुआ था, तब बस स्टैंड पर एक भी दुकान का निर्माण नहीं था। नगरपालिका ने बस स्टैंड के चहुं ओर भूखण्ड काटकर बेचने के बाद से ही निर्माण होना शुरू हो गया। बस स्टैंड के प्लेटफार्म के चारों ओर बनी दुकानों के बाद से ही दुकानों के आगे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। नगरपालिका अतिक्रमण रोकने की बजाए अतिक्रमणों को नियमन करती गई, जिससे बस स्टैंड चहुंओर से सिकुड़ता गया। दुकानों के आगे फिर बेंचें, कुर्सियां, टेबल लगा रखी है। टेबल कुर्सियों के आगे ठेले लग जाते है, जिससे बसों को घूमने व निकलने तक में परेशानी आती है।
टैक्सियों का भी बस स्टैंड पर ही जमावड़ा
बस स्टैंड का आधा हिस्सा टैक्सियों से अटा रहता है। नैनवां में टैक्सियां खड़ी करने के लिए बस स्टैंड के बाहर अलग से स्टैंड बना रखा है। टैक्सियों को टेक्सी स्टैंड पर खड़ा करने की बजाए बस स्टैंड पर ही टैक्सियां खड़ी कर देते है, जिससे बस स्टैंड और सिकुड़ जाता है।