सोनोग्राफी सुविधा के लिए रोगी लगा रहे 70 किमी की दौड़-video
– दर्जा बढ़ा सुविधाएं नहीं, महिला रोग विशेषज्ञ को भी प्रतिनियुक्ति पर हिण्डोली लगाया
– नैनवां उपजिला चिकित्सालय का मामला
नैनवां. बूंदी जिला मुख्यालय के बाद जिले में सौ बेड वाले सबसे बड़े नैनवां के उपजिला चिकित्सालय में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। खासकर महिलाओं के उपचार सुविधा सबसे ज्यादा प्रभावित है। उपजिला चिकित्सालय का दर्जा तो मिल गया, लेकिन सोनोग्राफी की सुविधा नहीं मिल रही। महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक तो नियुक्त है, लेकिन उसे प्रतिनियुक्ति पर दूसरे चिकित्सालय में लगा रखा है। सोनोग्राफी मशीन नहीं होने से मरीजों को सोनोग्राफी कराने की आवश्यकता पड़ती है तो 70 किमी दूर बूंदी,टोंक सवाईमाधोपुर या फिर कोटा जाना पड़ रहा है।
नियुक्ति नैनवां में, हिण्डोली में प्रतिनियुक्ति
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने नैनवां के उपजिला चिकित्सालय में नियुक्त एक मात्र महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पूर्वा शर्मा को प्रतिनियुक्ति पर हिण्डोली के चिकित्सालय में लगा रखा है। महिला रोग विशेषज्ञ के अभाव में महिला रोगियों को दिखाने के लिए बूंदी या कोटा जाना पड़ रहा है।
ढाई माह पहले सीएमएचओ ने 16 सितम्बर को डॉ. पूर्वा शर्मा को प्रतिनियुक्ति के लिए हिण्डोली के चिकित्सालय में प्रतिनियुक्ति पर लगाया था। सीएमएचओ ने उस समय बताया था कि हिण्डोली चिकित्सालय में लगी सोनोग्राफी मशीन को चालू करवाने के लिए आठ दिन के लिए व्यवस्थार्थ लगाया है। ढाई माह गुजर गए, लेकिन अभी तक डॉ. पूर्वा शर्मा की प्रतिनियुक्ति निरस्त नहीं करने से उपजिला चिकित्सालय में महिला रोग विशेषज्ञ का अभाव बना हुआ है।
यह बोले चिकित्सा प्रभारी
उपजिला चिकित्सालय प्रभारी डॉ. समदरलाल मीणा का कहना है कि चिकित्सालय में महिला रोग विशेषज्ञ नियुक्त है, जिसे ढाई माह से हिण्डोली लगा रखा है।
रेफर हो रहे जटिल प्रसव केस
चिकित्सालय से मिली जानकारी के अनुसार उपजिला चिकित्सालय बनने के बाद चिकित्सालय में प्रतिदिन तीन से चार प्रसव होते है। महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से कोई भी जटिल प्रसव का केस आता है तो उसे बूंदी रेफर करना पड़ रहा है। प्रति माह आठ से दस जटिल प्रसव वाले केस रेफर करने पड़ रहे है।