video: संकट में राज्य मॉडल बागान, अब राजीविका देगा जीवनदान
नैनवां. ग्राम पंचायतों की आय का स्रोत बनाने के लिए चरागाह भूमि पर राज्य मॉडल के रूप में विकसित बागानों को अब राजीविका संस्था संकट से उभारने को तैयार है। बागानों को बचाने के उपाय के लिए बुधवार को पंचायत समिति के प्रधान पदमकुमार नागर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की।
बैठक में विकास अधिकारी डॉ. सरोज बैरवा, भू संरक्षण विभाग के सहायक अभियंता थानमल नागर, राजीविका के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर रामबाबू मीणा, दुगारी पंचायत के सरपंच रामलाल खींची, ग्राम विकास अधिकारी मुकेश कुमार बैरवा मौजूद रहे।
बैठक में तय किया कि पौधों की निराई-गुड़ाई, खाद, दवाओं व सुरक्षा पर राजीविका द्वारा खर्च होने वाली राशि के बाद जितनी आय होगी उसका 60 प्रतिशत हिस्सा राजीविका व 40 प्रतिशत हिस्सा ग्राम पंचायत का होगा। राजीविका 15 वर्ष तक बागानों का संरक्षण करेगी। अभी दुगारी के पांच बागान ही राजीविका को सुपुर्द किए जाएंगे। इसके लिए अनुबंध पत्र तैयार करवाया जाएगा।
यह समिति करेगी देखरेख
विकसित चरागाह विकास के कार्यों को सी.एल.एफ. के माध्यम से संरक्षण, देखभाल एवं प्रबंधन हेतु कार्यों की देखरेख एवं मार्गदर्शन हेतु एक कमेटी का गठन किया जाएगा जो समय-समय पर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेगी। सहायक अभियंता जल ग्रहण विभाग, सहायक अभियंता पंचायत समिति, सहायक कृषि अधिकारी कृषि विभाग, सहायक कृषि अधिकारी उद्यान विभाग, ब्लॉक परियोजना प्रबंधक अधिकारी राजीविका विभाग, ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत दुगारी समिति की सदस्य होंगे।
संकट में आ गए थे बागान
जल ग्रहण विकास एवं भू सरंक्षण विभाग ने राजीव गांधी जल संचय योजना के तहत चरागाह भूमि विकास मॉडल के तहत सवा करोड़ से अधिक लागत से चरागाह भूमि पर विकसित किए बागानों में फलदार पौधों में फलाव आने लगा तो विभाग ने सुरक्षा व संरक्षण के लिए कोई बागवान नहीं मिलने से फलदार पौधों से सरसब्ज सात बागान लावारिस कर दिए। बागानों की सुरक्षा व संरक्षण को न बजट मिल रहा था न ही बागवान।
राजीव गांधी जल संचय योजना में भू सरंक्षण
विभाग ने फरवरी 2021 में दुगारी व खानपुरा में चरागाह विकास मॉडल के तहत पांच-पांच हेक्टर में बागानों के सात ब्लॉक विकसित किए थे। इनमें दुगारी में पांच व खानपुरा में दो ब्लॉक शामिल थे। प्रत्येक बागान में मौसमी, अनार, अमरूद, नार्थ एप्पल, नींबू, सीताफल, आंवला, इमली, लसोड़ा, जामुन के तीन-तीन हजार पौधे लगाए थे। पौधों की सिंचाई के नलकूप, सौलर सिस्टम, ड्रिप सिस्टम लगा रखे है।