बूंदी.चिकित्सा विभाग के परिवार नियोजन के लचर सिस्टम, लापरवाही व ऑपरेशन के बाद मरीजों का फॉलोअप नहीं करने से महिलाओं को दर्द झेलने के साथ ही जान भी गंवानी पड़ रही है। जिले में पिछले पांच साल में 280 नसबंदी का ऑपरेशन कराने के बाद फेल हुई है। इस अवधि में नसबंदी के बाद 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है।फेलियर व मौत के मामलों में करीबन 61 लाख रुपए का मुआवजा अदा करना पड़ा है।
जानकारी अनुसार नसबंदी असफल होने से दो महिलाओं की मौत हो चुकी है।2015 में सुंवासा निवासी अनिता पति फूलचंद व 2019 में हिण्डोली के पगारा निवासी मनीषा की मौत हो चुकी है, जिनको दो- दो लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।
फेलियर व मौत पर मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि
योजना के तहत नसबंदी ऑपरेशन के दौरान मृत्यु होने पर या नसबंदी ऑपरेशन की दिनांक से सात दिन के भीतर ऑपरेशन की वजह से मौत होने पर दो लाख रुपए की राशि का प्रावधान है। ऑपरेशन की दिनांक से 8 दिन से 30 दिन के भीतर मृत्यु होने पर 50 हजार रुपए अधिकतम दो लाख रुपए, नसबंदी ऑपरेशन असफल होने पर 30 हजार रुपए, ऑपरेशन की दिनांक से 2 माह के भीतर जटिलताएं होने पर इलाज के लिए अधिकतम राशि 25 हजार रुपए।
इस वजह से होते मामले फेलियर्स
वरिष्ठ विशेषज्ञ सर्जन डॉ. प्रभाकर विजय ने बताया कि महिला माहवारी के 35 दिन के भीतर प्रेग्नेंसी रिपोर्ट नेगेटिव आती है।उसी समय महिला नसबंदी करा लेती है, जिसके चलते नसबंदी फेल हो जाती है।वहीं महिला के शरीर में व्याधि रहती है,जिसके चलते ट््यूब सही तरह स नजर नहीं आने से पकडऩे में नहीं आती है और नसबंदी फेल हो जाती है। नसबंदी करते समय जो ङ्क्षरग लगाते है ,कभी उसकी ट््यूब टूट जाती है, जिसके चलते नसबंदी फेल जाती है।
फेक्ट फाइल
वर्ष नसबंदी फेलियर्स
2018-19 5000 55
2019-20 4417 55
2020-21 3975 51
2021-22 4200 60
2022-23 4733 59
गलत जानकारी देने पर नसबंदी मामले बिगड़ जाते है। हालांकि अब सावधानीपूर्वक पुष्टि होने के बाद ही नसबंदी की जाती है। कोई नसबंदी फेल न हो इसके लिए पूरा प्रयास किया जाता है।
डॉ. महेन्द्र त्रिपाठी,अतिरिक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी,बूंदी