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वाहनों की आवाजाही थमने से पंक्चर की दुकान वालों के रोजगार की गति थमी

जिस दिन से सडक़ों पर वाहनों की गति रुकी उस दिन से सडक़ों के किनारे लगी पंक्चर निकालने वालों के रोजगार की गति भी थम गई। लॉकडाउन के दिन से ही रोजगार बंद होने से पंक्चर की दुकान

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वाहनों की आवाजाही थमने से पंक्चर की दुकान वालों के रोजगार की गति थमी

वाहनों की आवाजाही थमने से पंक्चर की दुकान वालों के रोजगार की गति थमी

नैनवां. जिस दिन से सडक़ों पर वाहनों की गति रुकी उस दिन से सडक़ों के किनारे लगी पंक्चर निकालने वालों के रोजगार की गति भी थम गई। लॉकडाउन के दिन से ही रोजगार बंद होने से पंक्चर की दुकान लगाने वाले भी आफत में आ गए।
दिनभर में पांच सौ से सात रुपए रोज कमाने वालों के हाथ में 22 दिनों में पांच सौ रुपए तक की मजदूरी नहीं मिल पाई। नैनवां में मुख्य मार्गों पर पचास से अधिक लोग कम्प्रेशर रखकर पंक्चर निकालने का काम करते हैं। उससे होने वाली आय से ही परिवार का पालन होता है। नैनवां में बूंदी रोड पर दुकान लगाने वाले मोहम्मद जफर ने बताया कि 22 दिनों से काम बंद है। कभी कोई अटका-भटका अपने वाहन के टायर का पंक्चर निकालने आता है उस दिन सौ-पचास रुपए की आय जरूर होती है। इसी धंधे में लगे अशफाक उर्फ बंटी ने बताया कि जिस दिन लॉकडाउन हुआ तब से ही कम्प्रेशर ताले में लॉक है। बीस दिनों से एक रुपए की आय नहीं हुई।