अफसर शाही की लापरवाही से कुम्लाई सुखमहल की फुलवारी...मुग़ल शैली की तर्ज पर बनी फूल क्यारी अनदेखी का शिकार

मूगल स्थापत्य के बाग शैली का आभास देने वाला उद्यान अनदेखी का शिकार

By: Suraksha Rajora

Updated: 02 Apr 2018, 12:31 PM IST

बूंदी. जैतसागर झील की पाल पर स्थित सुखमहल परिसर में २०१५ में मुगल शैली की तर्ज पर विकसित किए गए उद्यान अनदेखी का शिकार हो रहा है। स्टोन पार्क के रूप में बनाए गए इस फूलक्यारी को बना तो दिया लेकिन देखरेख का जिम्मा निभाने वाले अफसर ों का इस ओर कोई ध्यान नही लिहाजा फूल क्यारी में केसर व रंग बिरंगे फूलों की खुशबू के बजाय यह गदंगी से अटा पड़ा है।

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मूगल स्थापत्य के बाग शैली का आभास देने वाले इस उद्यान को नया लुक देने की कवायद में सरकार ने पर्यटको को आकर्षित करने के मकसद से तैयार करवाया था जिससे सुखमहल के निकट का वातावरण महकता रहें। लेकिन फूलों से लकदक रहने के बजाय यह उद्यान उजाड़ नजर आ रहा है। बेजोड़ कलाकृति के इस नमूने पर गंदगी का साया मंडरा रहा है। धोलपुर, आगरा , श्रीनगर सहित कई शहरों में बनी मुगलकालिन तर्ज पर फूल क्यारी का कांसेप्ट था ताकि आने वाले पर्यटक सुखमहल के दीदार के साथ यहां बनी फूल क्यारी की सुगंधित वातावरण में सुकून का पल महसूस कर सके लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही ने पर्यटको को इस खूबसूरत पल से फिलहाल महरूम कर रखा है।

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जिम्मेदार भी इस बात से इत्तफाक रखते है कि यहां मेन पावर की कमी खलती है। ऐतिहासिक सुखमहल में बंदरो का पूरी तरह से राज कायम है। उद्यान में लगे विद्युत लैम्प टूट चुके है तो कहीं लगे ही नही चारो तरफ तारो का जाल, कबाड़, और गंदगी को देख पर्यटक खुद को ठगा सा महूसस करते है।

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सुखमहल में प्रवेश करने पर ही देशी पर्यटको का जहां ६० रूपए शुल्क लगता है वही विदेशी पर्यटको से २०० रूपए लिए जाते है। पहाड़ो के बीच यहां का मनोरम दृश्य हर कोई अपने कैमरे में कैद करने की इच्छा लिए आता है, लेकिन गंदगी देख मायूस हो उठता है। उद्यान के बीच बनी छतरी और फव्वारा के साथ सेल्फी लेने वाले पर्यटक खुद को उपेक्षित महसूस करते है।

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बीचो - बीच लगा फव्वारा भी समय के साथ खराब होने लगा है। उद्यान के चारो तरफ की दीवार जर्जर और बेरंग होने लगी है। चारो और पहाड़ हरियाली से च्छादित हो यह सुखमहल की सुंदरता में चार चांद लगाने वाले इस उद्यान में अब फूल क्यारियों में फूलों की बहार का इंतजार के साथ इसके सरंक्षण की दरकार है। यह है शुल्क- देशी पर्यटक-६० विदेशी पर्यटक-२००

जिम्मेदारों का कहना-
गार्ड की कमी की वजह से यह उद्यान मेंटेन नही हो पाता। मुगलकालिन फूल
क्यारियों की तर्ज पर इस उद्यान को तैयार किया गया है। २०१५ में आरटीडीसी ने बनाया था। यहां करीब १० का स्टॉफ है जो संग्रहालय, रानीजी की बावड़ी और सुखमहल का कार्य देखते है। गार्ड की व्यवस्था होने पर इस उद्यान में बनी फूल क्यारियों को रंग बिरंगे फूल व केसर की महक से गुलजार होगें।
उमराव सिंह अधीक्षक वृत पुरातत्व विभाग

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