
चरागाह भूमि पर अतिक्रमियों ने कर रखा कब्जा,भटकने को मजबूर मवेशी
-पंचायतें नहीं कर रही कार्रवाई
हिंडोली. हिंडोली पंचायत समिति की 42 ग्राम पंचायतों में स्थित चरागाह की 33 हजार बीघा भूमि में से अधिकांश पर अतिक्रमण हो रहा है। इससे मवेशियों को चारा नहीं मिल पा रहा है। ग्राम पंचायतों की ओर से अतिक्रमण हटाने के कोई खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पशुओं के लिए गोचर भूमि अर्थात चरागाह भूमि आरक्षित कर रखी है। कई पंचायतों में तो एक से डेढ़ हजार बीघा चरागाह भूमि है। चरागाह भूमि की रक्षा व देखभाल करने का जिम्मा ग्राम पंचायत का होता है। ग्राम पंचायतों द्वारा ध्यान नहीं देने से चरागाह भूमि पर अतिक्रमण हो गया है।
पंचायत प्रशासन व राजस्व विभाग चरागाह भूमि पर अतिक्रमण करने वालों पर मामूली जुर्माना करता है। इस कारण अतिक्रमियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। उन्होंने चरागाह भूमि पर पूरी तरह से स्वामित्व कर लिया है। यहां तक की चारदीवारी, कांटेदार बाड़ व आवास तक बना लिए हैं। चरागाह भूमि पर अतिक्रमण होने से गांवों व ढाणियों में मवेशियों के लिए चरने की जगह नहीं बची है। इससे मवेशी भटक रहे हैं।
पंचायतें नहीं निभा रही अपना फर्ज
जानकार सूत्रों की माने तो चरागाह भूमि कीा मालिक ग्राम पंचायत होती है। पंचायत की जिम्मेदारी है कि जिस गांव में भूमि कब्जे में है। उसे हटाने की जिम्मेदारी पंचायत की है, लेकिन पंचायतों द्वारा चरागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
राजस्व विभाग भी जिम्मेदार
चरागाह भूमि पर जुर्माने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की है। राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमियों पर नाममात्र का जुर्माना किया जाता है। इस कारण अतिक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
-चरागाह भूमि का स्वामित्व ग्राम पंचायतों के पास होता है। पंचायतों को समय-समय पर चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाना चाहिए।
सविता राठौड़, विकास अधिकारी पंचायत समिति हिंडोली
-सरपंचों की जिम्मेदारी है कि वह चरागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को देखे एवं लोगों से समझाइश कर वहां से अतिक्रमण हटाए। ताकि पशुओं को चरने का स्थान मिल सके।
कुलदीप सिंह रेण, अध्यक्ष सरपंच संघ पंचायत समिति हिंडोली
Published on:
29 Aug 2018 06:41 pm
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