बूंदी. हाडौती में कोटा के बाद बूंदी जिले में भी डेंगू पैर पसार चुका है। चिकित्सा विभाग व सरकार भले ही रोकथाम के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी के लिए इनके प्रयास नाकाफी साबित होते नजर आ रहे है। जिले में मौसम बदलने के साथ ही मौसम बीमारियों ने हमला कर दिया है।वर्तमान में उल्टी, डायरिया, दस्त,बुखार से मरीजों के हालात जहां खस्ता है।वहीं जानलेवा बीमारी डेगूं के मरीजों के चौकाने वाले आंकडे सामने आ रहे है। चिकित्सा विभाग की लापरवाही का परिणाम कि जिले में डेंगू जांच की मशीन पिछले काफी चार सालों से खराब है। सिर्फ कार्ड टेस्ट से मरीजों की जांच कर इलाज कर सन्तुष्ट किया जा रहा है।वहीं डेंगू के नाम पर निजी लैब व अस्पतालों की मनमानी जारी है।वही डेंगू पुष्टि एलाइजा टेस्ट के लिए मरीज को 35 किलोमीटर दूर कोटा जाना पड़ता है।
निजी नहीं सरकारी लैब पर हैं भरोसा
सभी निजी लैब में डेंगू की एनएस1 कार्ड से जांच की जाती है। नियम है कि निजी लैब को डेंगू की जांच करने के बाद एक सैंपल सरकारी अस्पताल को भी देना है, लेकिन ज्यादातर निजी लैब सैंपल नहीं देती हैं। अभी तक एक भी सैंपल नहीं दिया गया है। जबकि सभी निजी लैब में डेंगू की जांच की जा रही है। सरकारी लैब में एलाइजा टेस्ट किया जाता है। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग डेंगू के मरीज की पुष्टि
करता है।
एलाइजा टेस्ट रिपोर्ट ही मान्य
मलेरिया विभाग के अनुसार डेंगू के लिए एलाइजा टेस्ट को ही मान्यता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एंटिजन रेपिड टेस्ट को कोई मान्यता नहीं है और निजी लैब संचालक स्पष्ट रिपोर्ट भी नहीं दे सकते। इसके लिए उन्हें जांच रिपोर्ट में संदिग्ध लिखकर जिला अस्पताल में दोबारा जांच के लिए भिजवाना होता है, जिससे डेंगू के आंकड़े स्वास्थ्य विभाग को मिल सके। ओपीडी में दर्ज होने के बाद ही मलेरिया विभाग को डेंगू के सही आंकड़ों की जानकारी मिलती है। सूत्रों के मुताबिक शहर के कई निजी अस्पतालों में ही डेंगू जांच कर मरीज का इलाज भी किया जा रहा है। इन मरीजों के आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
एलाइजा में 7 तो जिला अस्पताल में 49 भर्ती
चिकित्सा विभाग से मिले आंकडों के अनुसार जिले में अगस्त माह में एलाइजा जांच में 7 डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई है। इस वर्ष में सरकारी आंकडों के अनुसार 15 डेंगू के मरीज सामने आए है। वहीं जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में डेंगू के 49 मरीज भर्ती हो चुके है। हालांकि इनकी जांच कार्ड टेस्ट से हुई है।
एकमात्र विकल्प भी खत्म
जिला अस्पताल में कोविड़ काल से ही एलाइजा मशीन खराब है।वही डेंगू जांच के लिए एक मात्र बचा विकल्प डेंगू जांच कार्ड भी जिला अस्पताल की लैब में खत्म हो चुके है। पत्रिका ने जानकारी की तो जिस फर्म से डेंगू जांच किट मिलता है।उस फर्म को भुगतान ही नहीं किया(
किट उपलब्ध कराने वाली फर्म को जल्द डेंगू किट देने के लिए बोला है। भुगतान से संबधित समस्या आ रही है। फर्म को जल्द भुगतान करवा दिया जाएगा।
प्रभाकर विजय ,पीएमओ जिला अस्पताल बूंदी
डेंगू कार्ड या निजी लैब की जांच को आधिकारिक रूप से डेंगू मरीज नहीं मान सकते है।एलाइजा टेस्ट होना ही अनिवार्य है।
कमलेश शर्मा, जिला मलेरिया अधिकारी, बूंदी