
टूटा हुआ पलंग
बूंदी. शहर में संचालित रैन बसेरों की हालत चिंताजनक है। यदि यूं कहा जाए कि इन रैन बसेरों की सुरक्षा और व्यवस्था भगवान भरोसे है तो गलत नहीं होगा। न तो ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना रजिस्टर में एंट्री दर्ज किए ही लोगों को रैन बसेरों में प्रवेश दे दिया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार के आपराधिक या नशेड़ी व्यक्ति के प्रवेश की आशंका बनी हुई है।
शहर में वर्तमान में तीन रैन बसेरे संचालित हैं। राजस्थान पत्रिका संवाददाता एवं फोटो जर्नलिस्ट ने सोमवार देर रात इन रैन बसेरों का जायजा लिया गया, जहां हालात चौंकाने वाले सामने आए। ठिठुरती सर्द हवाओं के बीच कई लोग जमीन पर सोते मिले तो कईयों ने बताया कि दी गई पतली रजाई में ठंड रुक नहीं रही। शौचालयों से बदबू आ रही थी। साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब नजर आई।
तीनों रैन बसेरों पर केयर टेकर मौके पर नहीं मिले, जिससे व्यवस्थाओं की निगरानी में पूरी तरह लापरवाही दिखी। रैन बसेरों में ठंड से बचाव के लिए न तो हीटर की व्यवस्था है और न ही गर्म पानी के लिए गीजर। पीने के लिए भी गर्म पानी उपलब्ध नहीं है। शहर में कई लोग रैन बसेरे दूर होने अथवा पहचान पत्र नहीं होने के कारण खुले आसमान के नीचे, फुटपाथों, दुकानों के बाहर एवं बस स्टैंड पर सर्द रातें काटने को मजबूर नजर आए।
देवपुरा रैन बसेरा - रात 9: 48 बजे
देवपुरा स्थित रैन बसेरे में रात 9 बजकर 48 मिनट पर पहुंचे। यहां मुख्य दरवाजे का छोटा गेट खुला मिला। अंदर पहुंचकर दो बार गेट बजाने पर भी कोई केयर टेकर सामने नहीं आया। आवाज देने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बाद में खिडक़ी से आवाज लगाने पर भीतर सो रहे एक व्यक्ति ने गेट खोला। डाटूंदा निवासी बाबूलाल ने बताया कि पतली रजाई में ठंड नहीं रुक रही। बगल के पलंग पर फटा चादर और तकिया पड़ा मिला। उसने बताया कि ठंड से बचाव के लिए गीजर की कोई व्यवस्था नहीं है। केयर टेकर के बारे में पूछने पर उसने अनभिज्ञता जताई। दबलाना निवासी श्योजीराम ने भी साफ-सफाई नहीं होने और शौचालयों से बदबू आने की शिकायत की।
कुंभा स्टेडियम रैन बसेरा - रात 10:11 बजे
कुंभा स्टेडियम स्थित रैन बसेरे की स्थिति सबसे अधिक खराब पाई गई। यहां बिना रजिस्टर में एंट्री दर्ज कराए ही लोग सोते हुए मिले। मुख्य दरवाजे पर केयर टेकर की कुर्सी खाली पड़ी थी। कंप्यूटर मौजूद था, लेकिन बंद अवस्था में मिला। अंदर कमरों में लोग सोते मिले और शौचालय से तेज दुर्गंध आ रही थी। रैन बसेरे में संचालित इंदिरा रसोई का एक कर्मचारी व्यवस्था संभालता नजर आया। केयर टेकर के बारे में पूछने पर उसने भी अनभिज्ञता जताई। यहां सो रहे जैतपुरा निवासी दुर्गालाल ने बताया कि उसे यहां बिना एंट्री किए के ही प्रवेश मिल गया। वह अदालत में मुंशी का काम करता है और आज कोई रजिस्टर एंट्री नहीं की गई। रजिस्टर की जांच करने पर एक रजिस्टर पूरी तरह खाली मिला, जबकि दूसरे में 31 दिसंबर के बाद कोई प्रविष्टि नहीं थी। मौके पर करीब 10 लोग बिना एंट्री के सोते मिले, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
लंकागेट रैन बसेरा - रात 10: 21 बजे
लंकागेट रोड स्थित रैन बसेरे में प्रवेश करते ही गेट के पास पलंग पर रजाई फैली हुई मिली। आवाज देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अंदर कमरे में दो लोग जमीन पर बिस्तर लगाकर सोते मिले। धनावा निवासी हेमराज ने बताया कि पलंग टूटा हुआ है, इसलिए उसे गद्दा जमीन पर बिछाकर सोना पड़ा। अन्य लोगों ने भी पतली रजाई में ठंड नहीं रुकने की शिकायत की। शौचालयों में साफ-सफाई का अभाव नजर आया। दूसरे कमरे में चार पलंग लगे थे, लेकिन वहां कोई सोता हुआ नहीं मिला।
Published on:
07 Jan 2026 12:20 pm
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