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आंखों की रोशनी हुई कम, फिर भी दौड़ा रहे है वाहन

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए सडक़ हादसों के बाद इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार के गंभीर होने के बाद प्रदेशभर में विशेष सडक़ सुरक्षा अभियान चलाया गया है। परिवहन विभाग द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लगाए गए नेत्र जांच शिविर में जिले के करीब 30 फीसदी चालकों की ²ष्टि कमजोर पाई गई है।

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आंखों की रोशनी हुई कम, फिर भी दौड़ा रहे है वाहन

बूंदी. आंखों की जांच करते हुए चिकित्सक।

बूंदी. प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए सडक़ हादसों के बाद इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार के गंभीर होने के बाद प्रदेशभर में विशेष सडक़ सुरक्षा अभियान चलाया गया है। परिवहन विभाग द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लगाए गए नेत्र जांच शिविर में जिले के करीब 30 फीसदी चालकों की ²ष्टि कमजोर पाई गई है। यह चौकाने वाले तथ्य 15 दिवसीय शिविर के दौरान चिकित्सकों द्वारा चालकों के किए गए नेत्र परिक्षण जांच के बाद हुआ है। ऐसे में चालकों को चश्में व आईड्राप देकर समय-समय पर आंखों की जांच कराने की हिदायत दी है। अभियान के दौरान विभाग ने जिले के ङ्क्षहडोली, केशवरायपाटन और इंद्रगढ़ टोल प्लाजा में शिविर लगाकर भारी वाहन चालकों की नेत्र जांच की गई।


15 दिवसीय शिविर 4 से 18 नवंबर तक चला। शिविर के दौरान मुख्य रूप से ट्रक, बस और ट्रेलर चालकों की आंखों की नि:शुल्क जांच कर उन्हें सडक़ सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक किया गया। अभियान के दौरान कुल 3600 वाहन चालकों की जांच की गई, जिसमें से करीब 820 चालकों की यानि करीब 30 फीसदी चालको की आंखें कमजोर पाई गई। इन चालकों नेत्र परीक्षण शिविर में नि:शुल्क आई ड्राप और चश्में बांटे गए है।


बिना चश्में के चला रहे वाहन
चिकित्सकों का कहना है कि ²ष्टि दोष वाहन दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बनता है, क्योंकि दूर की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखने से मोड़, संकेत, पैदल यात्री और अचानक सामने आते वाहन नजर अंदाज हो सकते हैं। शिविर के दौरान कई चालक ऐसे भी मिले, जिनके लिए चश्मा निर्धारित था, लेकिन वे बिना चश्मा लगाए ही भारी वाहन चला रहे थे। विशेषज्ञों ने इसे गंभीर बताते शीघ्र चश्मा लगाने की सलाह दी, ताकि आंखो में कमजोरी नहीं बने रहे। शिविर के नोडल अधिकारी डॉक्टर प्रदीप शर्मा ने बताया की नेत्र जांच शिविर में चालकों को सुबह ड्यूटी पर जाने के बाद फिर बिना नींद और चश्मा नहीं लगाने से रात में वाहन चलाने से भी आंखों में इफेक्ट पड़ता है। आंखों को भी कुछ देर के लिए आराम की जरूरत है। धूल, धूप, लंबी दूरी तय करने, नींद की कमी और आंखों की नियमित जांच न करवाने से अधिकतर भारी वाहन चालकों की ²ष्टि प्रभावित होती है।

& विशेष सडक़ सुरक्षा अभियान के दौरान चालकों के लिए नेत्र परिक्षण जांच शिविर आयोजित किया गया, जिसमें करीब 30 फीसदी चालकों की नजर कमजोर पाई गई है। उन्हें समय-समय पर आंखो की जांच कराने के लिए प्रेरित पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी। साथ ही यातायात नियमों के प्रति जागरूक भी किया गया।
धर्मपाल सिंह गुर्जर, परिवहन निरीक्षक, बूंदी

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