22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bundi Latest News : जींस पहनने के साथ पौधे लगाने के लिए आई काम, बूंदी में बना दिया अनूठा जींस पार्क, पढ़ें पूरा माजरा…

खेरूणा गांव में बनकर तैयार हुआ जींस पार्क। पुरानी जींस का बेहतरीन उपयोग करते हुए इनमें प्लांटेशन किया गया। इसे नाम दिया ‘जींस पार्क’

2 min read
Google source verification
Bundi Latest News : जींस पहनने के साथ पौधे लगाने के लिए आई काम, बूंदी में बना दिया अनूठा जींस पार्क, पढ़ें पूरा माजरा...

Bundi Latest News : जींस पहनने के साथ पौधे लगाने के लिए आई काम, बूंदी में बना दिया अनूठा जींस पार्क, पढ़ें पूरा माजरा...

बूंदी. जींस। नाम जेहन में आते ही पहनने के लिए पेंट सामने आती है। आए भी क्यों नहीं, वर्तमान युग में युवक-युवतियों के साथ-साथ अब बुजुर्गों की भी जींस पहली पसंद बन चुकी है। लेकिन यदि आपको कोई कहे कि जींस पहनने के साथ-साथ फुलवारी लगाने के लिए भी काम आती है तो हैरानी में पड़ जाएंगे।

लेकिन यह हैरानी वाली बात नहीं बल्कि बूंदी जिले में यह सच्चाई है। यहां जींस में न सिर्फ पौधे लगाए जा रहे हैं, बल्कि पूरा जींस पार्क ही बना दिया गया है। यह जींस पार्क आपको देखने को मिलेगा बूंदी जिले के खेरुणा गांव में। खेरूणा जिले के प्रथम ओडीएफ प्लस आदर्श गांव के कारण चर्चा में है। गांव को रचनात्मकता के साथ नया रूप देते हुए इसे संवारा गया है। हाल ही में एक और नया प्रयोग कर यहां अनूठा पार्क तैयार किया गया है। इसमें पुरानी जींस का बेहतरीन उपयोग करते हुए इनमें प्लांटेशन किया गया है। इसे नाम दिया है ‘जींस पार्क’।

विकास अधिकारी जगजीवन कौर के निर्देशन में गांव में सौन्दर्यकरण किया गया है। रचनात्मकता के साथ विभिन्न स्थानों को संवारा गया है। हाल ही में बीडीओ के निर्देशन में यहां पुरानी जींस का एकदम नए अंदाज में प्रयोग करते हुए इन्हें गमलों के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इनमें तरह-तरह के सजावटी पौधे लगाए गए हैं। इस तरह एक नए थीम पर पार्क विकसित किया गया है, जिससे पुरानी वस्तुओं के बेहतरीन उपयोग का संदेश दिया गया है। पहले भी यहां पुरानी और अनुपयोगी पड़ी वस्तुओं को आकर्षक रंगों से सजाकर एकदम नया रूप देकर निखारा गया है। पहियों, पीपों, डब्बों आदि को रोचक तरीके से सजाते हुए इन्हें उपयोगी बनाया गया है। पुरानी नाकारा पड़ी बैलगाड़ी तो यहां आकर्षण का खास केन्द्र बन चुकी है।


उल्लेखनीय है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के द्वितीय चरण में ग्रामों के ठोस एवं तरल कचरे का प्रबन्धन कर ओडीएफ प्लस ग्राम के रूप में विकसित करने के लक्ष्य को पूरा करते हुए खेरूणा गांव जिले का पहला मॉडल ओडीएफ प्लस गांव बना है। यहां पहले जगह-जगह अतिक्रमण से रास्ते और सार्वजनिक स्थान खराब हो रहे थे। नालियों का बुरा हाल था, कचरे, गोबर के ढेर लगे थे जिससे समस्त ग्राम का वातावरण दूषित हो रहा था।


जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरलीधर प्रतिहार के निर्देशन में विकास अधिकारी जगजीवन कौर की टीम जिसमें पंचायत समिति, बूंदी व ग्राम पंचायत रामनगर के अधिकारियों, कर्मचारियों व जन प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से रात्रि चौपालों का आयोजन कर ग्रामवासियों को ठोस एवं तरल संसाधन प्रबंधन के बारे में अवगत करवाया। अतिक्रमण हटाने व बबूल के पेड़ों की बाड़ के स्थान पर एल्यूमिनियम की जालियां आदि लगाने को प्रेरित किया है। जन सहयोग से प्रत्येक घर में निजी कचरा पात्र रखवाया गया तथा घरों से संग्रहित कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था की गई। मुख्य सडक़ के दोनों ओर पौधारोपण, ट्री गार्ड, गांव में 6 पार्क विशेषकर बच्चों के लिये बाल उद्यान में झूलों, बुजुर्गों के लिए चौपाल, उद्यान में बैठने की व्यवस्था की गई।
सतत् प्रयास व निगरानी से ग्राम वासियों का व्यवहार परिवर्तन होता गया और कुछ ही महीनों में गांव की तस्वीर बदल गई।