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Rajasthan News : छोटीकाशी की माटी के अमरूदों की महक देशभर में, हर जुबां पर छाया स्वाद

छोटीकाशी बूंदी की माटी में पककर तैयार हो रहा अमरूद का स्वाद अब हर जुंबा में घुल रहा है। साल दर साल वृद्धि से किसानों का इसकी बागवानी की ओर रुझान बढ़ गया। बूंदी में पैदा हो रहा अमरूद हाड़ौती ही नहीं बल्कि देश के कई प्रमुख शहरों में लोगों की पसंद बन गया।

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बूंदी

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Kirti Verma

Jan 31, 2024

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छोटीकाशी बूंदी की माटी में पककर तैयार हो रहा अमरूद का स्वाद अब हर जुंबा में घुल रहा है। साल दर साल वृद्धि से किसानों का इसकी बागवानी की ओर रुझान बढ़ गया। बूंदी में पैदा हो रहा अमरूद हाड़ौती ही नहीं बल्कि देश के कई प्रमुख शहरों में लोगों की पसंद बन गया। जानकारों की माने तो यहां के अमरूद का आकार देखकर ही लोग इसकी ओर आकर्षित होने लगे। बूंदी शहर सहित तालेड़ा, इंद्रगढ़, नैनवां, कापरेन, देई, उमरच व चापरस क्षेत्र में अमरूद के कई बगीचे लग गए। यहां के अमरूद अब देश की राजधानी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात व मध्यप्रदेश तक की मंडियों में पहुंचने शुरू हो गए। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्ष 2023 में अमरूद के बगीचों का रकबा बढकऱ 1197 हैक्टेयर हो गया। उत्पादन 7980 मैट्रिक टन हुआ। अमरूदों की दो किस्म है। हालांकि कोरोना के बाद अमरुदों के हैक्टेयर में कमी आई है। फिर भी लक्ष्य के अनुरुप उत्पादन बढ़ता जा रहा है। कृषि अधिकारी रोशन कुमार बताते है कि नवंबर माह से बगीचों में तुड़ाई का समय शुरू हो जाता है। 15 जनवरी बागवानी की जाती है। इस दौरान बीच-बीच में तुड़ाई का कार्य चलता है। जुलाई में फल लगते है, जिसकी तुड़ाई मार्च तक चलती है।

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अमरूदों की दो किस्म
अमरूदों की दो किस्म में लखनऊ- 49 व इलाहाबादी सफेदा अधिक पंसदीदा है। इसका उत्पादन अच्छा होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता (बीमारियां कम लगना) भी है। साइज अच्छी होने के साथ इसके फल का आकार गुणवत्तापूर्ण बताया गया है। कृषि वैज्ञानिक बताते है कि अमरूद का फल शरीर में पाचन शक्ति बढ़ाते हैं,साथ ही विटामीन-सी के अच्छे स्त्रोत है।

काम अब हाईटेक
अमरूद के बगीचें में भी कामकाज अब हाईटेक हो गए। इसमें किसान अपनी फसल को तैयार कर सीधे ठेकेदार को बेच देते हैं, जो बाद में स्वयं ही फलाव आने के बाद तोड़कर बेचे जाते है। ऐसे बगीचों में अमरूदों की पैकिंग का कार्य शुरु हो गया है।

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किसान दिखाने लगे रुचि
पिछले 15-20 वर्षों से जिले का अमरूद देशभर में प्रचलित है। 2005 से पहले तक राजस्थान में बूंदी के अमरूद उद्यान पहले नंबर पर बना हुआ था,तब मौसम की बेरुखी के चलते इसके प्रचलन में कमी आई, लेकिन एक बार फिर से यहां के अमरूदों के प्रति किसान रुचि दिखाने लगे।


बढ़ाया अनुदान, पौध स्वयं ला रहे
दूर-दराज तक फैली बूंदी जिले के अमरूदों की महक के प्रति किसानों का रुझान खूब बढ़ गया। वर्ष 2013 से कार्यालय खुलने के बाद से ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने इसका प्रचार-प्रसार भी किया। साथ ही किसानों को आ रही परेशानियों को भी दूर किया। इसी का परिणाम रहा कि किसानों के लिए यह मुनाफे का सौदा बन गए। कृषि विभाग के अधिकारी के अनुसार किसान को पौध स्वयं रजिस्टर्ड नर्सरी से लेना पड़ता है। अनुदान भी बढ़ा दिया है अब 75 फीसदी सरकार अनुदान देती है।

प्रमुख शहरों की पसंद
बूंदी की माटी का अमरूद हर जुंबा पर मिठास घोल रहा है। हर साल इसका रकबा बढ़ता जा रहा है। बगीचों में तुड़ाई के साथ पैकिंग का काम भी शुरू हो गय है। यहां का अमरूद देश के कई प्रमुख शहरों के लिए जा रहा है। वर्ष 2023 में 1197 हैक्टेयर रकबा हो गया है।
राधेश्याम मीणा, उपनिदेशक, उद्यान विभाग, बूंदी