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OMG: @47.2 गर्मी पहले भी थी पर ऐसी न थी… आखिर क्यों बड़ी छोटीकाशी में पहाड़ों की तपन…पढि़ए यह खास खबर…

हाड़ोती में गर्मी पहले भी पड़ती थी लेकिन ऐसी झुलसाने वाली गर्मी कभी नही पड़ी

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Special Report: hottest tourist city High temperature

OMG: @47.2 गर्मी पहले भी थी पर ऐसी न थी... आखिर क्यों बड़ी छोटीकाशी में पहाड़ों की तपन...पढि़ए यह खास खबर...

बूंदी एकदम कटोरेनुमा आकृति के अंदर बसी है। चारो तरफ पहाड़ो से घिरी किसी समय यह सेफ मानी जाता थी लेकिन उस समय की पहाडियो व आज में जमीन आसमान का अतंर आ गया है। पहले वृक्षों से ढक़ी रहती थी। वृक्षों के नीचे मिट्टी छोटी झांडिया व जमीनी पौधें होते थे जिससे टेम्प्रेचर कंट्रोल रहता था। आज बूंदी की हालत यह है कि पहाड़ पेड तो खत्म हो ही गए।

मिट्टी की कवर भी खत्म हो गई। मिट्टी की कवर खत्म हुई तो छोटी झांडिय़ा व पेडो का जो कवर था वो भी खत्म हो गया, उनसे जो नमी मेंटेन होती थी वो भी खत्म हो गई अब सिर्फ पत्थर रहा गया है। उस पत्थर पर सूर्य की किरण गिरने से जब वह गर्म होगा तो वही पत्थर की गर्मी रिफलेक्ट होकर हमें मिलेगी।

कल्पना करें कि हम ऐसे अंडर ग्रांउड में है जो ऊपर से ओपन है जिसमें एसी है न पंखे है ऊपर छत खुला हुआ है दीवारे बलुई पत्थर की बनी हुई है। तो क्या होगा? गर्म हवा जो पत्थर को गर्म कर रही है वो वापस शहर को सुपर हीट कर रही है।

गंजे खोखले पहाडा़े ने उगली आग


प्रोफसर डॉ. प्रहलाद दूबे का कहना है कि बूंदी के जो पहाडो के ऊपर पेड़ पौधे, झाडिय़ो, व मिट्टी और घास का कवर होता था जो इस ट्रेम्प्रेचर को कंट्रोल कर गर्मी से रोकता था और नमी को मेंटेन करता था वो खत्म होने के कारण यह बड़ा है और झुलसाने की वजह बना है। वरना हाड़ोती में गर्मी पहले भी पड़ती थी लेकिन ऐसी झुलसाने वाली गर्मी कभी नही पड़ी।

पहले हाड़ोती में पेड़ो घास और मिट्टी की लोग कद्र करते थे। अब तो पहाड़ के सिर के बाल काट दिए उसकी चमड़ी छीन ली अब तो हड्डी में भी छेद करके उसका ट्रेफिक निकाल लिया। तो ठंडक कहा से आएगी। पहाड़ो की शिराओं में जो थोडा़ बहुत पानी व नमी रहती थी, जिससे शहर ज्यादा गर्म नही रहता था वो हीट कहा जाएगी वो हीट वापस हमे ही मिलेगी।

भाप के इंजन की तरह देती है हीट


बूंदी राजकीय महाविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. एन. के. जैतवाल ने बताया कि बूंदी के पहाड़ों से वनस्पति समाप्त हो गई है। वनस्पति के समाप्त होने से सूर्य की सीधी किरणें इन चट्टानों पर पड़ती है। जिससे ये बहुत जल्दी गर्म हो जाती है और दोपहर 12बजे ही हीट उगलने लगती है, जो भाप के इंजन के समान होती है। जबकि वनस्पति से वाष्पीकरण हो जाता है। इससे तापमान कम होता है।

वर्तमान में वाष्पीकरण की प्रक्रिया नहीं हो पा रही है। इस कारण नमी नहीं होने से तापमान बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि रात को भी गर्म हवा चलने का यही कारण है। हवाएं आस-पास की चट्टानों से स्पर्श करके गर्म हो जाती है। पहाड़ों पर चौडी पत्ती वाली वनस्पति तो खत्म हो चुकी है। जिससे छाया रहा करती थी।

पूर्व मानद् वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वी सिंह राजावत का कहना है कि वातावरण में नमी रहने से मौसम ठंडा रहता था। वन्यजीवों को भी राहत मिलती थी। वर्तमान में धौक के पेड़ हैं जो भी सूख चुके हैं। खेतों में भी पेड़ नहीं है। ऐसे में सामूहिक रूप से पहाड़ों सहित समूचे बूंदी में जोरदार पौधारोपण कर उन्हें सहेजने की आवश्यकता है।