
माह-ए-रमज़ान: रमज़ान की खुशियों के आगे तपती गर्मी भी नही बनी बाधा
बूंदी. रमजान का आगाज हो चुका है। जुम्मे से पहले रोजे के साथ कुरआन की आयतें मस्जिदों में गूंजी। इससे पहले रात में विशेष नमाज तरावीह अदा की गई। अगले तीस दिनो तक मुस्लिम समुदाय अल्लाह की इबादत बड़े ही अनुशासित जीवन शैली के साथ करेगें। पहले ही दिन रोजेदारों को 15 घंटे 8 मिनट का रोजा रखना पड़ा। भीषण गर्मी में भी माहे रमजान की खुशियों के आगे परेशानी भी बाधा नही बनी।
युवा, वृद्धों के साथ नन्हे-मुन्ने अंकीदतमंदों ने रोजे रखना शुरू कर दिए हैं। सुबह से मस्जिदों में इबादत के लिए अकीदतमंदों की भीड़ रही। मदीना मस्जिद, जामा मस्जिद , बिस्मिल्लाह मस्जिद, एकमिनार मस्जिद सहित शहर की मस्जिदों में शुक्रवार को पहले रमजान पर विशेष नमाज अदा की गई। इस अवसर पर अमन चैन व खुशहाली की दुआ की गई। बच्चे भी नई पौशाक पहन खुदा की इबादत में सर झूकाएं खुशहाली की दुआ मांगी। इस मोके पर लोगो ने तकरीर भी सुनी।
सभी ने अलसुबह सहरी के बाद रोजा रखा और जुट गए इबादत में। दिनभर भूखे प्यासे रहकर शाम को रोजा इफ्तार किया। कई जगह सामूहिक रूप से रोजा अफ्तार के आयोजन हुए। अकीदतमंदों ने एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। घरों में महिलाओं ने सामुहिक रूप से रोजा अफ्तार करती है, जिससे आपसी प्रेम ओर परिवार में स्नेह बना रहें।
बाजार में रमजान की रौनक
बाजारों में रमजान की रौनक दिखाई देने लगी है। लोगों ने रोजा इफ्तार के लिए फल व मिष्ठान सहित अन्य दुकानों पर खाद्य सामग्री खरीदी। क्षेत्रों में मस्जिदों के आसपास मेले जैसा माहौल रहा। यहां लगी दुकानों ठेलों पर देर तक भीड़ रही है। शाम होते ही कोई खजूर तो कोई लजीज पकवान के लिए सामानों का इंतजाम करने में मशगूल दिखा।
इस्लाम एक संदेश-
रमजान पर पूर्व शहर वफ्फ कमेटी सदर मौलाना असलम ने कहा कि इस्लाम एक संदेश है जो इंसानों को ऐसी हिदायत का रास्ता दिखाता है, जिससे वह अपने आप को पहचान सके। अपनी हैसियत जान सके और दुनिया को पैदा करने वाले अल्लाह का हक अदा करे। इस्लाम में बताया गया है कि खुदा को एक मानें, एक जानो उसी से डरो, उसी की मर्जी के कार्य करो।
कायनात की सभी जीचें नष्ट हो जाने वाली हैं। सिर्फ खुदा की जात ही है जो हमेशा रहने वाली है वह इबादत के लायक है। इस महीने में खुदा ने इंसानो को सीधा रास्ता दिखाने के लिए अपनी आखिरी किताब कुरान पाक को नाजिल किया है, जो दुनिया में रहकर दुनिया तक इंसान की हिदायत के लिए रोशनी की मिनार है। रमजान में एक महिने तक रोजेदार की एक तरीके से ट्रेनिंग हो जाती है। वह सुबह से लेकर शाम खाना-पीना ओर अपनी ख्वाहिशों से परहेज करता है। रमजान का महिना सारी दुनियां को इंसानियत भाईचारा व प्रेम का संदेश देता है।
Published on:
19 May 2018 11:33 am
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