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बूंदी में अजीबोगरीब : नाम एक-गांव अनेक… ढूंढ़ते रह जाओगे

चाहे कोई चिट्ठी हो या फिर किसी मेहमान को परिचित के घर पहुंचाना हों, गांवों के समान नाम हैरत में डाल देते हैं  

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बूंदी में अजीबोगरीब : नाम एक-गांव अनेक... ढूंढ़ते रह जाओगे

बूंदी में अजीबोगरीब : नाम एक-गांव अनेक... ढूंढ़ते रह जाओगे


नागेश शर्मा : बूंदी. ‘जाना था जापान पहुंच गए चीन’ ये पुराना गीत आपने जरूर सुना होगा और सोचा भी होगा कि ऐसा कैसे हो सकता है, लेकिन बूंदी जिले में एक ही नाम के कई गांव हैं। ऐसे में यहां अक्सर चिट्ठी और मेहमान गलत गांव में चले जाते हैं और एक नया किस्सा बन जाता है। स्थानीय ग्रामीणों ने पास के दूसरे गांव का नाम साथ जोडक़र मेहमानों के लिए गफलत दूर करने की कोशिश की, लेकिन यह हमेशा कारगर नहीं हुई। तकनीक दौर से इन गांवों में पहुंचना भले आसान हो गया, लेकिन फिर भी असमंजस बना हुआ है। आइए आपको भी रूबरू करवाते हैं बूंदी जिले के इन गांवों और खास किस्सों से।


जब मेजबान, मेहमान और हलवाई अलग-अलग गांव पहुंचे
बुजुर्ग नंदलाल शर्मा ने बताया कि एक दशक पहले बालापुरा बालाजी के परिवार के साथ भोग लगाने गए थे। तब लाखेरी के निकट से खाना बनाने के लिए पंडित को बुलाया था। भोग जीमने में रिश्तेदारों को आमंत्रित कर लिया। हुआ यों कि परिवार के साथ सभी नियत समय पर मंदिर पहुुंच गए। पंडित नैनवां क्षेत्र के बालापुरा चला गया। रिश्तेदार नैनवां क्षेत्र के दूसरे बालापुरा में पहुंच गए। पंडित और मेहमान आयोजकों को तलाशते रहे तो मेजबान मेहमानों की राह तकते रहे। कोई नहीं मिला। तब मोबाइल का प्रचलन न के बराबर था। बाद में जब अन्य कार्यक्रम में मिले तो दिलचस्प किस्सा बनकर रह गया।

तीन से चार गांव हमनाम
नैनवां पंचायत समिति में बालापुरा ग्राम पंचायत में हीरापुर, तलवास का हीरापुर, माणी पंचायत का हीरापुर गांव हैं। कापरेन नगर पालिका क्षेत्र में भी हीरापुर गांव हैं। नैनवां पंचायत समिति में ही तीन मानपुरा गांव हैं। मानपुरा (खानपुरा), मानपुरा (गंभीरा), मानपुरा (ढोढ़ी) स्थित है। बालापुरा (ग्राम पंचायत मुख्यालय), बालापुरा (सिसोला), बालापुरा (भजनेरी), बालापुरा (कापरेन)। देवपुरा (बाछोला), देवपुरा (गुढ़ासदावर्तिया), देवपुरा (आंतरदा), देवपुरा (तलवास), देवपुरा (बूंदी), नयागांव (बालापुरा), नयागांव (डोकून), नयागांव (तलवास), नयागांव (हिंगोनिया) स्थित हैं।

स्वीकृति यहां की, वहां खुली पाठशाला
नैनवां पंचायत समिति के बालापुरा ग्राम पंचायत में करीब तीन दशक पहले आठवीं तक की स्कूल स्वीकृत हुआ था, लेकिन स्कूल बालापुरा-सिसोला में शुरू हो गया। पड़ताल हुई तो लंबे समय बाद माजरा स्पष्ट हुआ।

देवी-देवताओं को ढूंढते फिरे
बुजुर्ग दीनदयाल शर्मा ने बताया कि एक मर्तबा रिश्तेदार भवानीमंडी से नोताड़ा में देवी-देवताओं को भोग लगाने आए। वह नोताड़ा-धरावन के स्थान पर बीरज-नोताड़ा में पहुंच गए। पूरे गांव में मंदिर ढूंढ़ते रहे, लेकिन स्थान नहीं मिला। फिर गांव में पूछताछ की, जिन्होंने नजदीकी नोताड़ा-धरावन की जानकारी दी। तब देर रात अंधेरे में यहां पहुंचे। उन्होंने केकड़ी से भोजन बनाने के लिए पंडित बुलाया था, जो बस में बैठकर नोताड़ा भोपत में पहुंच गया। फिर धरावन का नाम लिया तो ग्रामीणों ने उसे गलत जगह आने की जानकारी दी।

तीन नोताड़ा घर में एक पड़ोस में
अब नोताड़ा गांव को लें। इस एक ही नाम के बूंदी जिले में तीन गांव हैं। एक गांव नजदीकी कोटा जिले में भी हैं। तालेड़ा पंचायत समिति के नोताड़ा को नजदीकी गांव भोपत का नाम जोडक़र नोताड़ा-भोपत बताना पड़ता है। केशवरायपाटन पंचायत समिति में दो नोताड़ा हैं। एक को बीरज का नोताड़ा और दूसरे को नोताड़ा-धरावन पुकारते हैं। कोटा जिले में मालियों का नोताड़ा कहते हैं।

गांवों के नाम में बदलाव राज्य सरकार के स्तर पर किए जा सकते हैं। इसके लिए ग्राम पंचायत में ग्रामीणों की सहमति से प्रस्ताव लिया जा सकता है। एक नाम के अधिक गांव होने से आम बोलचाल में परेशानी हो सकती हैं।
मुरलीधर प्रतिहार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बूंदी

कई बार दूसरे नोताड़ा गांवों के कागज, आधार कार्ड और रजिस्ट्री यहां पहुंच जाती है। इन पत्रों के ऊपर गांव का नाम सिर्फ नोताड़ा लिखा हुआ रहता है। जबकि संबंधित व्यक्ति की यहां पहचान नहीं होती तो फिर पत्र को वापस भेजना पड़ता है।
अजीत जैन, व्यवस्थापक, डाकघर, नोताड़ा -धरावन