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टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मृत मिला पैंथर का शावक

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जॉन में शनिवार शाम को एक पैंथर शावक मृत मिला।

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बूंदी

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pankaj joshi

Dec 23, 2024

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मृत मिला पैंथर का शावक

गुढ़ानाथावतान. गरड़दा व भोपतपुरा के बीच एक प्लांटेशन की दीवार के पास मृत पड़ा पैंथर शावक।

गुढ़ानाथावतान. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जॉन में शनिवार शाम को एक पैंथर शावक मृत मिला। मृत पैंथर का रविवार को बूंदी जैतसागर किनारे वन विभाग के जिला कार्यालय में पोस्टमार्टम करवा कर मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार भोपतपुरा गरड़दा सड़क पर वन विभाग के एक प्लांटेशन की दीवार के पास शनिवार शाम ग्रामीणों को पैंथर पड़ा हुआ दिखाई दिया। इसकी सूचना उन्होंने वन विभाग को दी।

सूचना पर भोपतपुरा वन नाका प्रभारी हरदयाल सिंह मौके पर पहुंचे तथा मौका मुआयना कर पैंथर शावक के मृत शरीर को कब्जे में लिया। शाम होने से वन्यजीव की डेड बॉडी को भोपतपुरा रेंज ऑफिस में रखवाया गया। रविवार को पैंथर का बूंदी में तीन चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। जिसमें सिर पर गंभीर चोट लगने से मौत होने की जानकारी सामने आई है। चिकित्सकों ने इस नर शावक की उम्र करीब डेढ़ साल बताई है। आशंका है की पैंथर की मौत किसी वाहन की टक्कर लगने से हुई होगी। पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा टाइगर रिजर्व के सहायक वन संरक्षक नवीन नारायण, हरि सिंह हाडा, नाका प्रभारी हरदयाल सिंह आदि उपस्थित थे।

दो शावकों के साथ नजर आ रही थी मादा पैंथर
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के इस इलाके में लंबे समय से एक मादा पैंथर दो शावकों के साथ देखी जा रही थी। ग्रामीणों व चरवाहों ने इस मादा पैंथर को कई बार शावकों के साथ देखा भी है। लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को भी दी थी। क्षेत्र में युवा होते एक पैंथर की मौत से टाइगर रिजर्व ने एक महत्वपूर्ण वन्यजीव खो दिया है।

टाइगर रिजर्व के बीच राजमार्ग बना खतरा
रामगढ विषधारी टाइगर रिजर्व के साथ-साथ चलने वाला टोंक जिले के उनियारा से भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया को जोड़ने वाला हाइवे संया 29 बाघ बघेरों सहित अन्य वन्यजीवों के लिए खतरा बन गया है। इस व्यस्ततम मार्ग पर पिपल्या से बिजोलिया तक का करीब 100 किलोमीटर का क्षेत्र वन्यजीवों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में टाइगर रिजर्व का अधिकतर भाग आता है। इस मार्ग पर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग नहीं होने से आए दिन दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत हो रही है। गुढ़ा नीम का खेड़ा क्षेत्र में ही विगत तीन महीने में आधा दर्जन सियारों की मौत इस सड़क पर हो चुकी है।