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रोगियों से दूर गंभीर बीमारियों की नि:शुल्क जांच, बाजार में लुट रहे रोगी

सरकार ने गंभीर बीमारियों की पहचान व उपचार के लिए मुफ्त प्रयोगशाला जांच सेवा शुरू तो कर दी

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Patients are free of serious diseases, patients suffering from market

बूंदी. सरकार ने गंभीर बीमारियों की पहचान व उपचार के लिए मुफ्त प्रयोगशाला जांच सेवा शुरू तो कर दी, लेकिन जांच योजना के प्रति चिकित्सा विभाग ही अनदेखी बरत रहा है। हाल यह है कि जिला अस्पताल में मुफ्त प्रयोगशाला जांच के प्रति चिकित्सकों का रुझान कम दिख रहा है। यही कारण है कि यहां पर रोजाना नाम मात्र की ही जांचें हो रही है। जबकि मुफ्त प्रयोगशाला जांच सेवा में होने वाली जांचें बाजार में काफी महंगी दर पर होती है। ऐसे में आम रोगियों को नि:शुल्क जांचों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल के आउटडोर में रोजाना गंभीर बीमारियों से पीड़त कई रोगी आ रहे हैं। जिन्हें जांच की आवश्यकता होती है। कई जांचें अस्पताल में नि:शुल्क जांच योजना में नहीं हो पा रही थी। जिन्हें करवाने के लिए रोगियों को बाहर जाना पड़ रहा था।ऐसे में राजस्थान सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन व क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स के संयुक्त गठबंधन से नि:शुल्क जांच योजना के तहत मुफ्त प्रयोगशाला जांच सेवा जिला अस्पताल में शुरू की गई थी।

महंगी जांचें, फ्री में भी क्यों नहीं करवा रहे
चिकित्सा सूत्रों के अनुसार मुफ्त प्रयोगशाला जांच सेवा के तहत सरकार ने जिला अस्पताल में सुबह ८ से रात को ८ बजे तक ३६ तरह की जांचें नि:शुल्क शुरू की है। जिसमें स्वाइन फ्लू, स्क्रब टायफस, डेंगू एलाइजा, यूरिन कल्चर, ब्लड कल्चर, स्टूल कल्चर, चिकनगुनिया, थाइराइड, थैलीसीमिया, विटामिन, कैंसर व बायएफसी सहित कई तरह की महत्वपूर्ण जांचें हो रही है। यहां पर गंभीर बीमारियों की सभी तरह की जांचों की सुविधा दी जा रही है। उक्त सभी जांचें बाजार में बहुत महंगी दर पर होती है। फिर भी जिला अस्पताल में रोजाना मात्र १५ से २० ही जांचेें हो रही है।

चिकित्सक नहीं दिखा रहे रुचि
प्रयोगशाला जांच सेवा के प्रति जिला अस्पताल के चिकित्सक भी कम ही रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे में यहां पर कम मात्रा में रोगी जांच के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि बाजार में निजी लैबों पर जांच के लिए रोगियों की भीड़ नजर आती है। चिकित्सा विभाग की अनदेखी के चलते बाजार में महंगी दर पर जांचें करवानी पड़ रही है। जबकि उक्त सभी जांचों की सुविधा जिला अस्पताल में ही है। फिर भी रोगियों का वहां तक पहुंचाने में चिकित्सा विभाग नाकाम है।

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