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तीज का मेला : लाखों खर्च, फिर भी कीचड़, आमजन बेहाल

हर बार की तरह इस बार फिर नगर परिषद ने यहां कुंभा स्टेडिय़म में तीज का मेला तो भरवा दिया है, लेकिन आज भी समस्या बरसों पुरानी जस की तस बनी हुई हैं।

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तीज का मेला : लाखों खर्च, फिर भी कीचड़, आमजन बेहाल

बूंदी के कुम्भा स्टेडियम तीज मेला स्थल पर भरा पानी व हो रहा कीचड़। module: c; hw-remosaic: 0; touch: (-1.0, -1.0); modeInfo: ; sceneMode: Auto; cct_value: 0; AI_Scene: (-1, -1); aec_lux: 101.76141; hist255: 0.0; hist252~255: 0.0; hist0~15: 0.0;

बूंदी.हर बार की तरह इस बार फिर नगर परिषद ने यहां कुंभा स्टेडिय़म में तीज का मेला तो भरवा दिया है, लेकिन आज भी समस्या बरसों पुरानी जस की तस बनी हुई हैं। वहीं मौसम,वहीं मेला और वहीं मैदान। हर साल की तरह कीचड़ की समस्या। बावजूद जिम्मेदार इसमें आज तक कोई सुधार के प्रयास नहीं कर सके। कई बोर्ड बदल गए, दावे हर साल पक्की सडक़ व अच्छा मेला भरवाने का करते हैं, लेकिन आज तक यह तस्वीर नहींं बदली। हालाकि भष्ट्राचार के आरोप खूब लगे, फिर भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला। भले ही बीच-बीच में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के हाथों में शहर की जनता ने सत्ता की चाबी सौंपी,लेकिन हमारी बूंदी की शान कजली तीज मेले की इस बदनुमा तस्वीर को बदलने की सोच किसी ने नहीं दिखाई। आलम ऐसा बना हुआ है कि मेले में आए हर दुकानदार नगर परिषद की व्यवस्था को कोसता हुआ नजर आ रहा है।

बारिश के चलते कार्यक्रम भी फीका
बारिश के चलते मेला मंच पर कई कार्यक्रम फीके पड़ जाते है। कीचड़ व गदंगी के कारण दर्शक भी नहीं पहुंच पाते है। ऐसे में लाखों रुपए खर्च कर आयोजित होने वाले कार्यक्रम दर्शकों को तरसा जाते हैं। दर्शकों का कहना है कि मंच के सामने डोम बनाते है, जिसने भी पानी भर जाता है। व्यवस्था सु²ढ़ नहीं हो पा रही है। कोटा से सीख लेकर ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

कोटा से सीख लेने की जरुरत
बूंदी के पड़ौसी शहर कोटा में हर साल दशहरे का मेला भरता है। दशहरा मैदान में जिस जगह दुकानें लगती है, वहां स्थायी रूप से डामर रोड बने हुए हैं, जिससे कीचड़ जैसी समस्या कहीं देखने को नहीं मिलती। हालांकि वहां मौसम भी अनुकूल होता है,लेकिन बारिश आ भी जाए तो हमारे जैसे हालात पैदा नहीं हो सकते। कई बार बोर्ड बैठक में भी यह मुद्दे उठ चुके है,लेकिन अंदर खाने यह व्यवस्था धूमिल हो रही है।

रसीद भी मनमर्जी की
मेले में दुकान लगाने आए दुकानदार सोनू व मिलन ने बताया कि दूर-दराज से आते है, लेकिन अंतिम समय में व्यवस्था नहीं हो रही है। अभी तक रसीद नहीं कटी है। एक दुकानदार ने बताया कि 5320 रुपए एक दुकान के लगते है तो वहीं दूसरा बोला हम से 7 हजार रुपए लिए है।

लाखों खर्च, फिर भी कीचड़
हर साल वहीं झींकरा और मिट्टी डालकर कुंभा स्टेडियम मैदान में मेला भरवाने की स्थिति को बदलने के लिए बरसों से कोई कदम नहीं उठाए गए। जबकि जानकार सूत्रों की माने तो नगर परिषद अपने कार्यकाल के दौरान जितनी राशि मेले में झींकरा, मिट्टी आदि डालने पर खर्च हो जाती है, उस राशि में डामर या सीसी सडक़ तक बनाई जा सकती है। यदि ऐसा हो तो हमारे मेले की तस्वीर भी बदल जाए और हर साल के बेवजह खर्चे से भी मुक्ति मिल जाए। सूत्रों के अनुसार हर साल करीब चार से पांच लाख रुपए से ज्यादा राशि मेले में मिट्टी, झींकरे आदि पर ही खर्च हो जाते है।