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परीक्षा से पहले प्रवेशोत्सव की टेंशन, शिक्षक दोहरी उलझन में, नामांकन बढ़ाने का दबाव

इस बार शिक्षक दोहरी उलझन में फंस गए है। यह पहला मौका होगा जब परीक्षा से पहले शिक्षा विभाग प्रवेशोत्सव कराने जा रहा है। जबकि वार्षिक परीक्षाएं अभी शुरू हुई नहीं उससे पहले शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के आदेश फरमा दिए है।

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परीक्षा से पहले प्रवेशोत्सव की टेंशन, शिक्षक दोहरी उलझन में, नामांकन बढ़ाने का दबाव

अध्ययन करते बच्चे

बूंदी. इस बार शिक्षक दोहरी उलझन में फंस गए है। यह पहला मौका होगा जब परीक्षा से पहले शिक्षा विभाग प्रवेशोत्सव कराने जा रहा है। जबकि वार्षिक परीक्षाएं अभी शुरू हुई नहीं उससे पहले शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के आदेश फरमा दिए है। कुछ इस तरह का नया प्रयोग संस्था प्रधानों के साथ शिक्षकों के लिए गले की गलफांस बनता नजर आ रहा है। या यू कहें तो यह आदेश शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है कि आखिर नामांकन बढ़ाए या फिर परीक्षा से पूर्व बच्चों की तैयारी करवाएं। अमूमन हर बार वार्षिक परीक्षा समाप्त होने व गर्मियों की छुटि़्टयों के बाद एक जुलाई से प्रवेशोत्सव के ढ़ोल बजने लग जाते है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो साल से सरकारी स्कूलों में नामांकन घटा है,जबकि परीक्षा परिणाम में सरकारी स्कूल परचम लहरा रहा है। ऐसे में इस बार 15 अप्रेल से प्रवेशोत्सव शुरू करने के पीछे सरकार की मंशा है कि शिक्षक अभी से गांवों में सर्वे में जुट जाए, ताकि जो बच्चा विद्यालय से वंचित है या किसी कारण वश विद्यालय नहीं जा रहा है तो उसे विद्यालय से जोड़ा जाए। बूंदी जिले में अभी करीब डेढ़ लाख नामांकन है।

क्या है प्रवेशोत्सव
प्रवेशोत्सव यानी सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की एक मुहिम होती है, जिसमें हर साल की भांति विभाग की ओर से प्रत्येक जिलों को गत वर्ष से 10 फीसदी नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य मिलता है। बकायदा शिक्षक इसके लिए जुटते भी है। हालांकि हर साल यह मई से जुलाई के बीच चलता है,लेकिन इस बार यह अप्रेल से ही शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि मई में राज्य स्तरीय परीक्षा के कारण पूरा शैक्षिक कैलेंडर बदल दिया गया है।

देना होगा पत्र, छुट्टियों से पहले काम का प्रेशर
शिक्षकों को शाला दर्पण एप के माध्यम से यह सभी जानकारी दर्ज करनी होगी। पहली कक्षा में प्रवेश के लिए अस्थायी प्रमाण पत्र सर्वे कर रहे शिक्षक द्वारा मौके पर ही दिया जाएगा। वहीं आठ मई को राज्य स्तरीय परीक्षा समाप्त होगी और 17 मई से ग्रीष्मावकाश शुरू हो जाएगा। ऐसे में शिक्षा विभाग को अपनी कार्य कुशलता साबित करनी थी तो उन्होंने 15 अप्रैल से ही प्रवेशोत्सव की शुरुआत कर दी।

प्रवेशोत्सव 2025-26: दो चरणों की योजना
प्रथम चरण: (15 अप्रेल से 16 मई)
हाउस होल्ड सर्वे और बच्चों का चिन्हिकरण: 15 अप्रेल से 9 मई तक
नामांकन अभियान और सीआरसी मॉड्यूल में प्रविष्टि: 10 मई से 16 मई तक
द्वितीय चरण: (1 जुलाई से 18 अगस्त)
पुन: हाउसहोल्ड सर्वे: (1 जुलाई से 24 जुलाई तक)
शेष बच्चों का नामांकन अभियान: 25 जुलाई से 18 अगस्त तक

सरकार के आदेशों की पालना के तहत शिक्षक नामांकन बढ़ाने में जुट गए है। दो चरणों में प्रवेशोत्सव चलेगा। ऐसे में अभी से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए, ताकि गांवों में सर्वे करके जो बच्चा विद्यालय से नहीं जुड़ पा रहे उनको जोड़ सके।
ओम गोस्वामी, जिला शिक्षा अधिकारी, बूंदी