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रियासतकालीन बाग उजड़ते रहे, बागवान देखते रहे

रियासतकालीन बाग (उद्यान) उजड़ते रहे और बागवान देखते रहे। शहर के बाग (उद्यान) बागवानों की अनदेखी से बदहाल हो गए।

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बूंदी

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pankaj joshi

Sep 19, 2024

रियासतकालीन बाग उजड़ते रहे, बागवान देखते रहे

नैनवां.नवलसागर तालाब के बीच स्थित रियासतकालीन बादलिया बाग।

नैनवां. रियासतकालीन बाग (उद्यान) उजड़ते रहे और बागवान देखते रहे। शहर के बाग (उद्यान) बागवानों की अनदेखी से बदहाल हो गए। नैनवां को टाउन प्लानिंग के हिसाब से बसाने वालों ने शहर की सुंदरता के लिए तालाबों के बीच उद्यानों का भी निर्माण कराया था। तालाबों के बीच उद्यान खाके के रूप में आज भी नजर आते है, जो दूर से तो मोह रहे, अंदर जाकर देखो तो उजाड़ बने हुए है।

बागवानों ने बागों को संवारने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की। इनकी बहार नहीं लौटा पाए। नवल सागर तालाब के अन्दर स्थित रियासतकालीन बादलियां बाग तो इतना मनोहारी है जो पानी के बीच टापू जैसा लगता है। नवलसागर तालाब की सुंदरता बढ़ाने के लिए तालाब के बीच ही बादलिया बाग का निर्माण कराकर पिकनिक स्थल का रूप दिया था। सुरक्षा के लिए पक्की चारदीवारी का निर्माण कराया था। बाग में कई प्रकार के छाया,फूल व फलदार वृक्षों से सरसब्ज किया था। अन्दर फूलवारी के लिए अलग अलग जोन व क्यारियां बनी हुई हैं, क्यारियों तक पानी पहुंचाने के लिए पक्के धोरे बने हुए हैं। पानी के लिए बावड़ी है, जो भी ढहकर तालाब में समा गई।

रामबाग उजड़ गया
नवलसागर तालाब के राजघाट के पास भी बाग का निर्माण कराया था, जिसे राम बाग का नाम दिया गया था। राम बाग उजड़ जाने से नामों निशां तक नही बचे है। सिर्फ बिलायती बबूलों का जंगल बन गया। इसी तरह कनक सागर तालाब के किनारे भी बगीची का निर्माण हुआ था, जिसे आज भी बागरियो की बगीची के नाम से जाना जाता है, जो भी उजड़ जाने से खाका बनकर रह गई।

गणेश बाग नहीं बचा, बन गए भवन
महल के नीचे पूर्व दिशा में भी बाग का निर्माण कराया था। बाग में गणेश मंदिर होने से गणेश बाग के नाम से जाना जाता है। बुजुर्गो का कहना है कि रियासतकालीन शासकों ने महल के पास बाग का निर्माण राज परिवार के सदस्यों के सैर-सपाटा करने के लिए बनाया था। गणेश मन्दिर में गणगोर पूजन करती थी। बाद में इसे आम जन के लिए खोल दिया। आज भी बाग में स्थित गणेश मन्दिर में गणगोर पूजन की परम्परा जारी है। गढ की बावड़ी से ही बाग को सिंचित करने के लिए पक्के धोरे बने हुए थे। बाग के स्थल जेल, विद्यालय सहित अन्य सरकारी भवन के निर्माण से गणेश बाग में अब गणेश प्रतिमा ही रह गई बाग नहीं रहा।

हर्बल पार्क को नहीं मिला संरक्षण
कनकसागर के किनारे स्थित द्वारिकाधीश बगीची को कुछ लोगों ने हर्बल पार्क के रूप में विकसित करने के लिए कई प्रकार कर पौधे लगाए थे। हर्बल पार्क को संरक्षण नहीं मिल पाया। पार्क की दीवार टूट गई, जिससे मरम्मत नही हो पाई। हर्बल पार्क से बागरियों की बगीची के बीच को सुरक्षा दीवार बनाकर पार्क के रूप में विकसित करने का कार्य शुरू किया, जिसे भी अधूरा ही छोड़ दिया। तालाब के लबालब होने से द्वरिकाधीश व बागरियों की बगीची पानी में डूबी हुई है।