रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लंबे समय से बाघिन शिफ्टिंग का इंतजार रविवार को खत्म हो गया। रणथम्भौर में तीन दिन की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम को इस काम में सफलता मिली है।
बूंदी/पत्रिका न्यूज नेटवर्क. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लंबे समय से बाघिन शिफ्टिंग का इंतजार रविवार को खत्म हो गया। रणथम्भौर में तीन दिन की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम को इस काम में सफलता मिली है। बाघिन टी-119 ट्रेंकुलाइज करने के बाद रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के लिए देर शाम रवाना किया गया।रणथम्भौर टाइगर रिजर्व प्रथम के डीएफओ मोहित गुप्ताने बताया कि पिछले दो-तीन दिन से रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बारिश के मौसम के चलते टाइग्रेस को ट्रैक नहीं किया जा सका था, जिसकी वजह से टाइग्रेस शिफ्टिंग में देरी हो रही थी।
टाइग्रेस को वन विभाग की तीन टीम लगातार ट्रेस करने की कोशिश कर रही थी, जिसके बाद रविवार शाम करीब पांच बजे वन विभाग की टीम ने बाघिन टी-119 को गुढा वन क्षेत्र में ट्रेस किया, जिसकी सूचना टीम ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों को दी। सूचना मिलने के बाद वन विभाग के उच्चाधिकारी गुढा वन क्षेत्र पहुंचे। यहां पहुंचकर बाघिन को साढ़े छह बजे ट्रेंकुलाइज किया गया।
बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के बाद रणथम्भौर की वेटरनरी डॉक्टर की टीम ने टाइग्रेस का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसके बाद बाघिन को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के लिए सड़क मार्ग से भेज दिया गया।
बाघ टी-57 और बाघिन टी-60 की बेटी है टी-119
बाघिन टी -119 की उम्र करीब 4 साल उम्र है। बाघ टी-57 और बाघिन -60 की बेटी है, जिसकी टेरीटरी रणथम्भौर के मोर डूंगर पेराफेरी में थी, जिसकी वजह से बाघिन को रिलोकेट किया गया है।
रणथम्भौर से टी 119 को रविवार शाम को ट्रेंकुलाइज कर लिया गया, जिसे देर रात तक बाजोलिया में बनाए गए क्लोजर में छोड़ा जाएगा।
संजीव, शर्मा, उप वन संरक्षक,रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र
अब रामगढ़ में छह बाघ-बाघिन
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अब छह बाघ-बाघिन हो गए है। गत दिनों यहां एक मात्र बाघिन ने तीन बच्चों को जन्म दिया था। वहीं एक और बाघिन मिलने के साथ इनकी संख्या अब छह हो जाएगी।
15 वाहनों का लवाजमा बाघिन लेकर हुआ रवाना
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से वन विभाग के अधिकारियों का लवाजमा करीब 15 वाहनों के लवाजमे के साथ रवाना हुआ। इस पूरे टाइगर रिलोकेशन प्रोग्राम में करीब 30 वनाधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।