
गांव का रास्ता खराब होने से दो किलोमीटर तक शव को चारपाई से घर ले जाते ग्रामीण (फोटो: पत्रिका)
Bundi News: बूंदी के रायथल थाना क्षेत्र के मालियों की बाड़ी रिहाना में मंगलवार रात जहरीले कीड़े के काटने से एक महिला की मौत हो गई। पुलिस ने शव का बूंदी राजकीय जिला चिकित्सालय में पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया।
ग्रामीण सुरेश सैनी ने बताया कि काली बाई (60) पत्नी बद्री लाल जाती माली खेत पर कार्य कर रही थी। इस दौरान जहरीले कीड़े ने उसे काट लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए बूंदी लेकर गए। जहां चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। बुधवार सुबह रायथल थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया।
मालियों की बाड़ी से लोहली गांव तक रास्ता खराब होने से महिला की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सालय ले जाने के लिए उसे दो किलोमीटर तक चारपाई से लेकर आए, जिससे चिकित्सालय पहुंचने में देर हो गई। और महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि मालियों की बाड़ी से लोहली तक तो पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है।
लोहली से मुख्य सड़क तक का रास्ता भी खराब हो चुका है, जिससे महिला को बूंदी तक पहुंचने में दो घंटे बीत गए। समय पर उपचार नहीं मिलने से महिला ने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया। शव को बूंदी से घर लेकर आए तो एंबुलेंस ने भी दो किलोमीटर पहले लोहली गांव में ही उतार दिया। जहां से शव को भी चारपाई पर लेकर जाना पड़ा। ग्रामीणों ने रास्ते को लेकर रोष प्रकट कर रास्ता ठीक करवाने की प्रशासन से मांग की है।
वहीं रामगंजबालाजी क्षेत्र के नंदजी का खेड़ा गांव में फिर एक महिला की मौत हो जाने के बाद में उसका दाह संस्कार करने के लिए ग्रामीणों को लगभग एक किलोमीटर से अधिक कीचड़ भरी राह से गुजरना पड़ा। ऐसे में कई जगह ग्रामीण अर्थीं सहित गिरते-उठते मुक्तिधाम पर पहुंचे। लालपुरा पंचायत के नंदजी का खेड़ा मजरा गांव से दाह-संस्कार के लिए दलदल भरे रास्ते पर शवयात्रा निकाली गई। यहां पर एक माह में यह दूसरा मामला है। लालपुरा पंचायत मुख्यालय के पास के नन्दजी का खेड़ा गांव में सोमवार को बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। उसकी शवयात्रा दलदल भरे रास्ते से शमशान घाट ले जाया गया।
मृतका गोपाली बाई पत्नी प्रभुलाल मीणा के पुत्र देव प्रकाश एवं सोनू मीणा, भतीजा शंकरलाल मीणा ने बताया कि लालपुरा पंचायत मुख्यालय से शव को दलदल भरे मार्ग से खटिया पर रख कर घर पर ले जाया गया। सुबह दलदल भरे मार्ग से वापस शवयात्रा को श्मशान घाट तक ले जाया गया। दलदल घुटनों तक होने के कारण शवयात्रा में शामिल परिजनों एवं ग्रामीणों कहीं जगह पर गिरते-पड़ते नजर आए। हर साल बरसात के समय मजरे में रहने वाले लोगों का मार्ग दलदल भरा होने से वाहनों के आने-जाने का रास्ता बंद हो जाता है।
Updated on:
31 Jul 2025 10:17 am
Published on:
31 Jul 2025 10:14 am
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