13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

400 साल प्राचीन कुंडी भंडारे की कुंडी धंसी

- पानी का प्रवाह थमा, 80 फीट नीचे पर्यटकों के उतरने पर रोक- पहली बार कुंडी को बड़ा नुकसान- रिडर्सफेस्ट- कई कुंडियों पर गिरे पेड़

3 min read
Google source verification
400 year old Kundi Bhandare's latch sunk

400 year old Kundi Bhandare's latch sunk

बुरहानपुर. विश्व प्रसिद्ध जल प्रणाली कुंडी भंडारा की कुंडियों को भारी नुकसान पहुंचा है। भारी बारिश के कारण 38 नंबर की कुंडी धंस गई। इसका ऊपरी हिस्सा नीचे जा गिरा, जिससे कुंडी को नीचे की सतह पर भी नुकसान पहुंचा। इससे पानी का पूरा प्रवाह रुक गया। जहां से पर्यटक नीचे उतरते हैं वहां पानी जमा हो गया, इसलिए 80 फीट नीचे उतरने पर रोक लगा दी गई। पहली बार प्राचीन कुंडियों को भारी नुकसान पहुंचा है। पर्यटक मायूस होकर वापस लौट रहे हैं। बड़ी बात यह है कि इस अनोखी धरोहर को यूनेस्को में तक शामिल करने के प्रयास चल रहे हैं।
कुंडी भंडारे की सबसे आकर्षक और इस धरोहर को संभालने के लिए कुंडियां ही महत्वपूर्ण कड़ी है। पहले भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके लिए इसे लोहे की जाली से घेरा गया। लेकिन भारी बारिश से कुंडियों को भारी नुकसान हुआ है। आसपास के पानी के बहाव से 38 नंबर की कुंडी धंस गई। इसका ऊपर हिस्सा 80 फीट नीचे जा गिरा। जिससे पानी चॉक हो गया। कुंडी का पानी का प्रवाह थम गया। प्रमुख कुंडी भंडारे के बीच रोडकिनारे ही यह कुंडी होने से फिलहाल आसपास कांटे लगाकर इसे बेरिकेटिंग की गई।
कुंडियों पर गिरे पड़े पेड़ अब तक नहीं हटे
38 नंबर कुंडी के पहले ही दो से तीन कुंडियों पर भारी पेड़ भी गिर पड़े। गनीमत है जाली होने से कुंडियों को नुकसान नहीं पहुंचा। लेकिन जालियां तेड़ी हो गई। पिछले दस दिन पहले यहां हवा आंधी से नुकसान पहुंचा।अब तक निगम ने इसे हटाने की जरूरत नहीं समझी।
अनदेखी पड़ी भारी
दरअसल पहले से यह अवगत था कि खेतों के पानी से निकासी न होने से इसका पानी रोडके नीचे से बहने से कुंडियों को नुकसान पहुंचेगा। इसके बाद भी इसकी सुध नहीं ली गई। निगम का कहना है कि इसके रिपयेरिंग के लिए पुरातत्व विभाग को अवगत कराया था, फिर जल संरक्षण के लिए काम करने वाली इफको संस्था से भी बजट मांगा गया, जब तक कुंडी धंस गई। अब निगम 12 लाख रुपए खर्चकर नीचे से ऊपर तक नईकुंडी बनाएगा।

कारंजा तक पानी सप्लाय भी थमा
कुंडी भंडारे का करीब 3000 लीटर पानी कारंजा में जमा होने के बाद लालबाग पानी की टंकी में मोटर द्वारा पहुंचाया जाता है। जहां से पूरा लालबाग क्षेत्र मिनरल वाटर कहे जाने वाले भंडारे का पानी पीता है। फिलहाल यह सप्लाय भी बंद है।
भंडारे में कतक किया गया काम
- 1615 ईस्वी में भंडारे का निर्माण किया गया था
- 1992 तक भंडारे की देखरेख निगम करती थी, इसके बाद राज्य पुरातत्व विभाग ने इसकी जिम््मेदारी ली
- 1999 से 2002 तक भंडारे की सफाई की गई थी
- 2015 में फिर सफाईकराईगई
इंफो ....
400 वर्ष हो गए हैं कुंडी भंडारे के निर्माण को
103 कुंडिया है कुंडी भंडारे में
2.5 किमी की लंबी सुरंग है भंडारे की

ऐसा है भंडारे का इतिहास
नगरवासियों को शुद्ध जल की आपूर्ति करने के उद्ेश्य से खानखाना के शासन काल में 1615 ई में अब्दुल रहीम खानखाना ने जल संग्रह-वितरण प्रणाली का निर्माण ारंभ किया था। उस दौरान 8 जल संग्रहण-वितरण प्रणालियों को निर्मित किया गया। इस प्रणाली के अंतर्गत तत्कालीन भू-गर्भ विधा विशेषज्ञों ने सतपुड़ा पर्वत मालाओं से ताप्ती नदी की ओर प्रवाहमान भूमिगत जल स्त्रोतों को खोजकर जलाशय बनाया था। इनकी नहरें 80 से 100 फीट तक गहरी हैं। इनकी सफाई, हवा, प्रकाश व्यवस्था को ध्यान में रखकर जगह-जगह कुडियों का निर्माण किया गया। प्रणाली की विशेषता यह थी कि पानी स्वयं बहकर बिना किसी यांत्रिकीय सहयोग के पूरे शहर में पहुंचता है।
20 साल पहले लगी थी लिफ्ट
सतपुड़ की पहाडिय़ों से रिसकर सुरंगों में जमा हुआ पानी 400 साल पहले बनाए गए मुगल स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूना है। आज भी मिनरल वाटर से भी बेहतर यहां का पानी लालबाग के लोगों की प्यास बुझा रहा है। भंडारे को निहारने के लिए 20 साल पहले यहां लिफ्ट लगाई गई थी ताकि पर्यटक कुंडियों के अंदर जाकर संरचनाओं को निहार सके। साल भर पहले यहां फिर नई लिफ्ट लगाई गई।
इसलिए खूनी भंडारा नाम पड़ा
- इस खूनी भंडारे (कुंडी भंडारा) का निर्माण लगभग दो लाख की शाही सेना और 35 हजार की स्थानीय आबादी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया था।
- आपूर्ति व्यवस्था के निर्माण में लगभग दो साल लगे और फारसी भू.वैज्ञानिक तबकुतुल अर्ज के मार्गदर्शन में 16 15 में इसका काम पूरा हुआ।
- सतपुड़ा की पहाडिय़ों से बहकर कुंडियों में आने के कारण यहां पानी का रंग हल्का लाल था, जिसके कारण ही इन भंडारण कुंडियों का नाम खूनी भंडारा पड़ा।
सभी कुंडियां एक सीध में थीं और अंदर ही अंदर एक.दूसरे से जुड़ी हुईं।
. पहले इसका पानी बुरहानपुर शहर तक पहुंचाया जाता था, जो बदलते समय के साथ व्यवस्था बंद हो गई।
- मूल भंडारा, चिंताहरण भंडारा, जली करंज, लालबाग मंडी भंडारा, गोल भंडारा और शकर तालाब भंडारा वर्तमान में बंद हो चुके हैं, लेकिन जमा पानी को साफ रखने के लिए इन जगहों पर बने 1.5 मीटर ऊंचे हवादार रोशनदान अब भी मौजूद हैं।
- बारिश का पानी खेत से बहकर निकासी न होने के कारण कुंडी भंडारे के आसपास की मिट्टी बहने के बाद इससे कुंडी धंस गई। 12 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाया है। नीचे से ऊपर तक नईकुंडी बनेगी। इसका काम शुरू कर दिया गया है।
- विशाल मोहे, कार्यपालन यंत्री नगर निगम