
91 की उम्र में पूरी की 400 पेज की किताब, लंदन और मुंबई से मंगवाए स्कैच और फोटो
यह है किताब की विशेषता
नंदकिशोर देवड़ा बताते हैं कि पहले यहां फारुखी, मुगल, फिर निजाम आए, पेशवा आए फिर सिंधिया को साम्राज्य सौंपा गया इसके बाद ब्रिटिश आए। उन्होंने कहा कि मेरे अपने जीवन के अनुभव का निचोड़ इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। यह किताब हिंदी और अंग्रेजी में लिखी है। इसमें इतिहास ही नहीं यहां के जनजीवन के स्पंदन की पुस्तक है। इसमें 1900 से लेकर 1948 तक के जीवन को उल्लेखित किया है। इतिहास के अलावा शहर के विकास में योगदान देने वाले प्रसिद्ध लोग जैसे डॉक्टर हकीम, नाना महाराज, प्रभुनाथ शास्त्री का भी जिक्र है। आर्य नबी की महफिलें, पांडूमल सेठ का चौराहा, परमानंद गोविंदजीवाला, भग्गू हलवई की जलेबी, बाइ साहब की हवेली यहां का जीवन जीवन क्या था। यहां के मंदिर मस्जिद, साहित्य सामाजिक जीवन शैली और राष्ट्रीय आंदोलन में किन लोगों ने भाग लिया इसका भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा हमारे यहां के प्रसिद्ध आयोजन बारागाड़ी का भी उल्लेखित किया।
मुंबई के विद्यार्थियों ने तैयार किए स्कैच
इस पुस्तिक को तैयार करने में बड़ी बात यह थी कि जिन धरोहरों का जिक्र 100 साल पहले का करना था, उस समय की फोटो नहीं थी। इतिहासकारों से जानकारी तो मिली कि पहले इनकी दशा क्या था। इनके स्कैच तैयार करवाने के लिए नंदकिशोर देवड़ा जेजे आर्टस स्कूल मुंबई पहुंच गए, यहां सीधे 10 से 15 युवाओंं के बीच पहुंच गए, जहां विद्यार्थी भी देवड़ा को अपने बीच देख अचरज में पड़ गए। फिर उन्होंने पूरी बात बताई तो यहां के युवा बुरहानपुर आकर स्कैच बनाने को तैयार हुए और इसके लिए वे कई बार बुरहानपुर आए। उन्होंने कई धरोहरों का चित्रण कर स्कैच तैयार किया, जो किताब में प्रकाशित है। इस किताब को प्रकाशन में भोपाल के इतिहासविद् सुरेश मिश्रा का भी सहयोग रहा।
लंदन और मुंबई से मंगवाना पड़े स्कै च
बाई साहब की हवेली और मुगल, जहांगीर और अकबर किस तरह दिखते थे, उस बारे में फोटो तो उपलब्ध हो गए, लेकिन यह काल्पनिक थे। देवड़ा को पता चला कि बुरहानपुर के इतिहास के बारे में लंदन और मुंबई के संग्रहालय में भी फोटो और जानकारी है, फिर लंदन से बाई साहब की हवेली का चित्र मंगवाया, यह हवेली शाह बाजार में थी, मुंबई से मुगल, अकबर और जाहंगीर के फोटो मंगवाए। अगले माह हिंदी में भी दिल्ली से किताब प्रकाशित होकर आ जाएगी। फिर इनका विमोचन होगा। अब नंद किशोर देवड़ा 40 पेज की किताब भी बनाएंगे, जो 10वीं और 11वीं के बच्चों को बाटेंगे।
Published on:
16 Jun 2019 11:45 pm
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