
After ten years of maid mistakenly murdered owner gets jail
बुरहानपुर. हिंदी फिल्मों की तरह एक खेत मालिक ने अपनी नौकरानी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। मामला 22 जनवरी 13 में बसाड़ रोड स्थित बनिया नाला के पास खेत का है। कोर्ट ने डीएनए टेस्ट के आधार पर खेत मालिक को जेल की सजा सुनाई।
आरोपी राकेश दलाल अक्सर खेत पर ही रहता था। मृतिका का पति मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गया हुआ था। 22 जनवरी 2013 की रात आरोपी ने महिला के साथ संबंध बनाए इसके बाद उसकी हत्या कर दी। मृतिका के सिर पर चोट के निशान भी मिले थे। मामले को आत्महत्या बताने के लिए आरोपी दूसरे दिन 23 जनवरी की सुबह खेत पहुंचा यहां लोगों को बताने के बाद पुलिस को सूचना दी। ताकि किसी को उस पर शक न हो। प्रारंभिक जांच में पुलिस भी आत्महत्या ही मान रही थी। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने दुष्कर्म व हत्या की पुष्टि करने के बाद हत्या का केस दर्ज हुआ। जांच के दौरान लोगों ने राकेश दलाल और महिला के संबंध होने की बात कही थी। पांच माह बाद आई डीएनए रिपोर्ट में भी यह खुलासा हो गया।
खेत में काम करने वाली नौकरानी से ज्यादती कर हत्या करने व साक्ष्य छिपाने के मामले के आरोप में डीएनए जांच के बाद खेत मालिक को दोषी पाते हुए सत्र न्यायाधीश एसबी वर्मा ने उम्रकैद की सजा व जुर्माने से दंडित कर खंडवा जेल भेज दिया।
मामले में मृतिका की तरफ से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक श्याम देशमुख ने बताया. आरोपी खेत मालिक राकेश पिता हेमलाल दलाल 40 निवासी गुरुगोविंदसिंह कॉलोनी लालबाग रोड ने घटना के दूसरे दिन बाद फरियादी बनकर निंबोला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि मेरे खेत की नौकरानी 50 का शव कुएं मेें पड़ा हुआ है। मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर के चोट के निशान व दुष्कर्म की पुष्टि डॉक्टरों ने की। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म व हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की। ब्लाइंड मर्डर होने से आरोपी को पकडऩा मुश्किल काम था। संदेह के आधार पर पुलिस ने खेत मालिक राकेश दलाल सहित आसपास में रहने वाले सात लोगों का डीएनए टेस्ट कराया। जिसमें राकेश दलाल का डीएनए टेस्ट व एफएसएल जांच में मृतिका के शरीर व आसपास मिले खून के निशानए कपड़ों से मैच हो गया। इस आधार पर पुलिस ने राकेश के विरुद्ध 302 हत्या 376 दुष्कर्म 201 साक्ष्य छिपाना आईपीसी के तहत केस दर्ज किया था। मंगलवार को हुए फैसले में धारा 302 में उम्रकैद धारा 376 में सात साल धारा 201 में तीन साल जेल की सजा से दंडित किया। तीनों धाराओं मे 20 हजार रुपए जुर्माना से भी दंडित किया है।
आरोपी को बचाने के लिए बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ी आपस में नहीं जुड़ती है। इस कारण अभियुक्त पर कोई आरोप प्रमाणित नहीं होते। इस पर माननीय न्यायालय ने कहा. आज के वैज्ञानिक व तकनीकी जांच में डीएनएन जांच रिपोर्ट को पूरी तरह सही सत्य व विश्वसनीय माना गया है एवं मात्र डीएनए जांच रिपोर्ट आधार पर ही आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।
Published on:
15 Nov 2017 12:32 pm
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