6 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्राचीन जल संरचना चिंहाहरण विलुप्त, कुंडी भंडारे से भी जल सप्लाय व्यवस्था ठप

- आज जल संसाधन दिवस- प्राचीन जल संसाधनों को हम जीवित नहीं कर सके

2 min read
Google source verification
Ancient water structure signs extinct, water supply system stalled even from Kundi Bhandara

Ancient water structure signs extinct, water supply system stalled even from Kundi Bhandara

बुरहानपुर. विलुप्त होती प्राचीन जल संरचनाओं को समय रहते जीर्णोद्धार नहीं करने से अब यहां से जल सप्लाय की व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई। वहीं कुंडी भंडारे का भी जल स्तर गिरने से अब यहां से भी जल सप्लाय व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इन प्राचीन धरोहरों पर फोकस किया जाए तो लालबाग क्षेत्र में टैंकरों से जल सप्लाय की नौबत नहीं आएगी।
चिंताहरण
400 साल पहले तक चिंताहरण और कुंडी भंडारे से पूरे शहर को जल सप्लाय की व्यवस्था थी। धीरे धीरे यह प्राचीन जल संरचनाएं चिंताहरण विलुप्त होती गई। जबकि कुंडी भंडारे से भी जल सप्लाय व्यवस्था पर असर पड़ गया। अब हालात यह है कि लालबाग क्षेत्र में टैंकरों से जल सप्लाय की नौबत आ गई। क्षेत्र के पूर्व पार्षद अमर यादव का कहना है कि कुंडी भंडारे से जल सप्लाय नहीं हो पा रही है। शमशान घाट क्षेत्र में भी पानी की मोटर खराब हो गई। क्योंकि ट्यूबवेल का जल स्तर गिरने से मोटर दम नहीं भर पा रही है। अब गांधी कॉलोनी, शिवाजी वार्ड, इंद्रजीत नगर, गुलाबगंज क्षेत्र में टैंकर से जल सप्लाय कर रहे हैं, हालांकि अभी बहुत ज्यादा टैंकरों की मांग नहीं है, लेकिन आगामी समय जल संकट विकराल रूप लेगा।
ऐसी है चिंता हरण की जल प्रणाली
पातोंडा पंचायत में सतपुड़ा पहाड़ी में बने चिंता हरण का पानी भूमिगत सुरंगों से 3 किलोमीटर दूर जाली कारंजा तक पहुंचता है। यहां से पहले पानी सप्लाय होता था। इसके प्रवाह के लिए 150 कुंडियों का निर्माण किया गया था, जो आज 50 कुंडियां जीवित है। 70 फीट गहरी इन कुंडियों में आज भी 20 फीट तक पानी भरा हुआ है। पांच साल पूर्व तत्कालीक इंदौर संभाग आयुक्त ने यहां का दौरा कर इसके संरक्षण के लिए डेढ़ करोड़ रुपए सेंशन भी किए थे, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा।
कुंडी भंडारा
प्राचीन कुंडी भंडारा से अप्रैल के पहले सप्ताह से ही जल सप्लाय व्यवस्था ठप हो गई। गर्मी से जल स्तर गिर गया। बारिश के मौसम में कुंडी में 4 से 5 फीट तक पानी रहता था, जो अब 2 से 2.5 फीट पर आ गया। कुंडियों के संरक्षण पर तो ध्यान है, लेकिन इसमें जल की उपलब्धता आगे भी बनी रहे, इस पर केवल प्लानिंग लंबे समय से चल रही है।
वर्तमान में जल सप्लाय के हालात
निगम की माने तो शहर में प्रतिदिन 21 एमएलडी पानी सप्लाय होता है। पूरी सप्लाय व्यवस्था 296 ट्यूबवेल पर निर्भर है। भारी गर्मी में इनका जल स्तर गिरने लगा है। इस कारण मोटर दम नहीं भर पा रही है और कई जगह से मोटर जलने की शिकायत आ रही है।
यह की है प्लानिंग
जल सप्लाय के लिए निगम ने फिलहाल यह व्यवस्था की है कि जहां एक वार्ड में दो समय पानी आ रहा था, वहां एक ही समय पानी दिया जाएगा। जल संकट के हालात बनने पर टैंकरों से पानी सप्लाय करेंगे। संपवेल में पानी डालेंगे यहां से पानी कुंडी से नलों में जाएगा।
मैंने चिंताहरण का पूरा सर्वे किया है। यह 150 फीट चौड़ा और 90 फीट से ज्यादा गहरी है, इसमें पानी है और सहायक कुंड भी है, जिसमें से चार रास्ते है पानी सप्लाय के बने हैं। चिंताहरण जीवित होने की स्थिति में है, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए।
शालीकराम चौधरी, सदस्य पुरातत्व समिति बुरहानपुर