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अर्चना चिटनीस को फिर मंत्री बनने की प्रबल दावेदार

- 15 साल मंत्री पद के अनुभव से चिटनीस को बड़ी जिम्मेदारी मिलना तय- प्रदेश की राजनीति में रहा है बुरहानपुर का दबदबा- कई नेताओं से मेल मुलाकात, कैबिनेट मंत्री में कई पद संभाले

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Archana Chitnis a strong contender to become minister again

Archana Chitnis a strong contender to become minister again

बुरहानपुर. विधानसभा चुनाव निपटने के बाद अब सबकी नजर शहर से विधायक चुनकर भोपाल पहुंची भाजपा की उम्मीदवार अर्चना चिटनीस पर है। पिछले दो दिन से चिटनीस भोपाल में ही है। यहां वे कई नेताओं से भी मिल रही है। माना जा रहा है कि पिछले 15 साल के लंबे अनुभव को देखते हुए अर्चना चिटनीस को फिर कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलना तय है। ऐसा होता है तो फिर बुरहानपुर का कद प्रदेश में बढ़ेगा। इसके पहले तीन बार चिटनीस कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री का पद संभाल चुकी है।
शुरू से ही बुरहानपुर प्रतिनिधि को मिलता रहा पद
बुरहानपुर से चुनाव जीते भाजपा हो या कांग्रेस के विधायक हमेशा से यहां के प्रतिनिधि को बड़ी ही जिम्मेदारी मिली है। मप्र में 1951 में बुरहानपुर विधानसभा में चुनाव होने पर कांग्रेस पार्टी के अब्दुल कादर सिद्दिकी चुनाव जीते। इनकी हैट्रिक रही, तीन बार लगातार 1951 से 62 तक ये चुनाव जीते और मंत्री मंडल तक का रास्ता तय किया। फिर बीजेएस से प्रोफेसर बृजमोहन मिश्रा चुनाव जीतकर मंत्री बने। 2008 में अर्चना चिटनीस चुनाव जीती जो 2013 में भी चुनाव जीतने के बाद मंत्री मंडल में शामिल हुई।
अब तक ये बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुकी चिटनी
2003 में अर्चना चिटनीस ने नेपानगर विधानसभा से जीत हासिल की। कांग्रेस के रघुनाथ चौधरी को हराने के बाद वह 12 वीं विधानसभा के लिए चुनी गयी। उस समय उन्होंने महिला और बाल विकास, समाज कल्याण, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण, पशुपालन, गौ संवर्धन बोर्ड और सामाजिक न्याय मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
2008 में बुरहानपुर से चुनाव लड़ा और विधायक के रूप में चुनी गईं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के हामिद काजी को 32854 मतों के अंतर से हराया। फिर वह शिक्षा और महिला और बाल विकास मंत्री के रूप में कार्य किया।
2013 में अर्चना चिटनीस ने फिर से बुरहानपुर से जीत हासिल की और शिवराज सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल हुईँ। उन्होंने महिला और बाल विकास मंत्री के रूप में कार्य किया।
1984 अर्चना चिटनीस ने छात्र राजनीति में प्रवेश किया और इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की विश्वविद्यालय प्रतिनिधि बन गयी। गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज छात्र संघ की सचिव भी रही है।
1986 में भाजपा राष्ट्रीय महिला मोर्चा की कोषाध्यक्ष भी रही।
अब तक दो चुनाव हारी
1998 में नेपानगर विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा और कांग्रेस के रघुनाथ चौधरी से हारी।
2018 में बुरहानपुर विधानसभा चुनाव से निर्दलीय उम्मीदवार सुरेंद्रसिंह से हारी।
निमाड़ में बुरहानपुर का बढ़ा कद
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का पूरे निमाड़ में बेहतर प्रदर्शन रहा। लेकिन जो बड़ी जीत दर्ज हुई वह बुरहानपुर और नेपानगर से ही हुई। नेपा में भाजपा की मंजू दादू ने 40 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की। जबकि बुरहानपुर विधानसभा से अर्चना चिटनीस ने 30 हजार से अधिक मतों से जीत हांसिल की।