
Burhanpur: Saheb is a AIDS sufferer, people do not fill the faucet with water
- शर्मसार होती मानवता
बुरहानपुर. छूने से एड्स नहीं फैलता यह बात कई बार कार्यशालाओं में सुनने और विज्ञापनों में देखने को मिली। लेकिन अब भी एड्स पीडि़त ऐसे लोगों से परेशान है, जो इस बीमारी का नाम सुनते पीडि़तों से दूर भागने लगते हैं। ऐसा ही एक मामला नेपानगर क्षेत्र का है। जहां एक एड्स पीडि़ता जब नल पर पानी भरने जाती है, तो लोग उसे गालियां देकर भगा देते हैं। यह दर्द खुर्द पीडि़ता ने कलेक्टोरेट को बताया।
मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंची एड्स पीडि़ता ने बताया कि आवास है न घर में शौचालय। बाहर पानी भरने जाओ तो महिलाएं दूर भगाती है। शौचालय के लिए जंगल में जाना पड़ता है। लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं देता। समस्या बताते हुए चार साल में दो कलेक्टरों के तबादले हो गए है। लेकिन हमारी समस्या दूर नहीं हुई। पीडि़ता की परेशानी इतनी ही नहीं बड़ी बात यह थी कि उसका पति भी एड्स पीडि़त है और वह इतना गंभीर है कि पलंग से उठ नहीं सकता। पीडि़ता ने कहा कि वह कच्चे मकान में रहती है और जमीन वन विभाग की है। उस जमीन के दस्तावेज नहीं है। पति इतना बीमार है कि घर से बाहर नहीं आ पाता, जैसे-तैसे कर में घर चलाती है। चिंता दो मासूम बेटियों की है, हमारे बाद इनका क्या होगा। दोनों बेटियों को एड्स नहीं है।
१५० मीटर पैदल चलकर आए अपर कलेक्टर, सुनी समस्या
महिला कलेक्टोरेट में अपनी समस्या बताकर मायूस लौट रही थी। इस बीच महिला ने मीडिया को अपनी कहानी सुनाई और मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की बात कहने लगे। जब अपर कलेक्टर को जानकारी मिली, तो वह 150 मीटर तक पैदल चलकर आए और फिर समस्या सूनी।
एड्स पीडि़ता की समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया जाएगा। नियमानुसार जो भी सुविधाएं शासनस्तर पर उपलब्ध हो सके, दी जाएगी।
- रोमानुसा टोप्पो, अपर कलेक्टर
Published on:
12 Dec 2017 09:02 pm
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