17 साल की उम्र में घर से निकलकर मुंबई पहुंच गया। मिशन था सीए बनने का। काका एमजी अग्रवाल के घर की छत तो मिल गई, लेकिन पढ़ाई पूरा करने के लिए बस जुट गए काम करने। उद्योगनगर में काम करने से लेकर फुटपाथ पर कपड़े बेचने का काम किया। 12 साल संघर्ष कर अध्यापक बने, 1999 में मुंबई में डिब्बेवालों पर 9 साल तक शोध करने के बाद मोटिवेटर बन गए। 55 साल की उम्र में अब तक 40 देशों में 8 अलग-अलग भाषा में लाखों लोगों को मोटिवेट कर चुके हैं। यह कहानी है इंटरनेशन मोटिवेटर मुंबई के डॉक्टर पवन अग्रवाल की। रविवार को रोटरी क्लब के कार्यक्रम में आए डॉक्टर अग्रवाल से पत्रिका ने विशेष बातचीत की। महाराष्ट्र के धुलिया जिले के डोंडाइचा गांव के रहने वाले डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि 10वीं कक्षा फेल होने के बाद उनकी पढऩे की कोई इच्छा नहीं थी।