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कार, बंगला चाहिए तो शिवरात्रि पर इस तरह करें शिव पूजन

117 साल बाद महाशिवरात्रि पर बन रहा शनि और शुक्र का दुर्लभ योग21 फरवरी को पर्व, मंदिरों में तैयारी शुरू फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिव पूजा का महापर्व  

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 Shiva Temple

असीरगढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर।

बुरहानपुर. महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी शिवलयों में शुरू हो गई है। 9 दिन बाद यह पर्व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। मंदिरों में रंग-रोगन के साथ सजावट की जा रही है। प्राचीन मंदिर में खास तौर पर भक्तों की भीड़ रहेगी। इस बार शिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। दुर्लभ संयोग होने के कारण इस बार शिव भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

पंडित शैलेंद्र मुखिया के अनुसार जब सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात यह पर्व मनाया जाता है। 21 फरवरी की शाम 5.36 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। शिवरात्रि रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसलिए इस साल यह पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा।

शाही किला परिसर और असीरगढ़ पर स्थित मंदिर पर रहेगी भीड़
शहर के प्राचीनतम असीरगढ़ किले पर स्थित शिव मंदिर पर भक्त दर्शन के लिए पहुंचेंगे। इसके अलावा शाही किला स्थित शिव मंदिर, महाजनापेठ में गुप्तेश्वर मंदिर, प्रतापपुरा में हाटकेश्वर मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर पूजन के साथ अनुष्ठान होगा।

1903 में बना था इस तरह का दुर्लभ योग
इस साल शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। यह एक दुर्लभ योग है, जब यह दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। 2020 से पहले 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। इस साल गुरु भी अपनी स्वराशि धनु राशि में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिल सकती है। 21 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। पूजन और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह योग शुभ है।

शिवरात्रि पर 28 साल बाद बनेगा विष योग
इस साल शनि ने 23 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश किया है। शिवरात्रि यानी 21 फरवरी पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि.चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। इस साल से पहले करीब 28 साल पहले शिवरात्रि पर विष योग 2 मार्च 1992 को बना था। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। शिवरात्रि पर यह योग बनने से इस दिन शिव पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है।