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बुरहानपुर का नाम ब्रह्मपुर करने की पहल, कांग्रेस बोली-ध्यान भटका रही भाजपा

भाजपा ने बुरहानपुर को ब्रह्मपुर नाम करने की पहल शुरू कर दी

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बुरहानपुर. देश में कई शहरों के नाम बदलने के बाद बुरहानपुर में भी नाम परिवर्तन को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। गुरुवार को भाजपा ने बुरहानपुर को ब्रह्मपुर नाम करने की पहल शुरू कर दी। इस पर कांग्रेस ने कहा कि भाजपा महंगाई, बेरोजगारी और विकास के काम नहीं कर रही है, केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह काम शुरू कर दिए। भाजपा ने बुरहानपुर का नाम बदलकर प्राचीन ब्रह्मपुर किए जाने की मांग उठाई है। बुरहानपुर आए भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी को भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज लधवे ने एक पत्र सौंपा।

प्राचीन नाम धार्मिक पुराणों में उल्लेख
भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज लधवे ने कहा, आजादी के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकारों की तुष्टीकरण की नीति के चलते अनेक शहरों के नाम मुगल शासकों के नाम पर रखे गए, जबकि इन नगरों के प्राचीन नाम धार्मिक पुराणों में उल्लेखित है। लघवे ने कहा, प्राचीन ग्रंथों व ताप्ती पुराण में भी इस नगर का नाम ब्रह्मपुर के रूप में उल्लेखित है। इस बात के पर्याप्त प्रमाण है कि पूर्व में इस नगर का नाम ब्रह्मपुर के रूप में ही प्रचलित था।


कांग्रेस बोलीं, ध्यान भटकाने का काम

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अजय रघुवंशी ने कहा कि भाजपा विकास के काम नहीं कर रही है, ताप्ती मिल चालू हो नहीं रही। ताप्ती पर डेम की कोई योजना नहीं। ताप्ती मेगा रिचार्ज कांग्रेस के समय शुरू हुई थी, जो अब तक आगे नहीं बढ़ी। नाम बदलने की राजनीति कर जनता का ध्यान भटकाने का काम किया जा रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, विकास पर ध्यान नहीं है।

ऐसी है नाम बदलने की प्रक्रिया

जिले या शहर का नाम बदलने के लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय आदेश जारी करता है, जबकि राज्य सरकार इसके लिए प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजती है। केंद्र सरकार कई तरह के सर्वे कराने के बाद नाम परिवर्तन की मंजूरी देती है।

क्या कहते हैं पुरातत्व समिति मेंबर

पुरातत्व समिति सदस्य होशंग हवलदार का कहना है हमारा स्मृति और श्रुति पुराण के अनुसार यह शहर भृगुऋषि की तपोभूमि रही। इसलिए इस नगर का नाम ब्रह्मपुर हुआ। बादशाह अकबर के समय भी इसे ब्रह्मपुर कहा करते थे। 1626 में जरमन यात्री ने उस समय मोनस्टरल जर्मन कोस्मोग्राफिया के नाम से किताब भी लिखी, जिसमें ब्रह्मपुर (बुरहानपुर) लिखा है। यह किताब लंदन लाइब्रेरी में है।

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इनका बदला है नाम

प्रदेश में भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन रानी कमलापति और मिंटो हाल कुशाभाऊ ठाकरे सभागार के बाद धार्मिक नगरी होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम करने पर मुहर लगी है।