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प्राचीन मंदिर पर आने वाला भक्त नहीं जाता भूखा

कभी स्कूल मैदान परिसर में था मंदिर अब दोनों तरफ बन गए हाईवे
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Editorial Khandwa

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Updated: 31 Jul 2017, 5:11 PM IST

Old famous shiv tample in burhanpur

Old famous shiv tample in burhanpur

बुरहानपुर.
सावन माह में पत्रिका की मंदिर यात्रा रविवार को शहर के सुभाष उत्कृष्ठ विद्यालय के पास बने प्राचीन शिव मंदिर के पास पहुंची।यह मंदिर की महिमा भी पूरे शहर में प्रसिद्ध है। गुरुवार को यहां आने वाला भक्त भूखा नहीं जाता।सभी को यहां नि:शुल्क रूप से भोजन कराया जाता है।यह परंपरा कईसालों से यहां चली आ रही है।

प्राचीन श्री भैरव बाबा शिव मंदिर का इतिहास तो 300 साल से भी अधिक है।लेकिन इसकी वास्तविक जानकारी किसी के पास नहीं है। कोई इसे सिंधिया घराने द्वारा स्थापित मंदिर बताता है, तो कोई मुगल दौर का। लेकिन समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार होता गया और यह विशाल रूप ले चुका है।इसमें शिवजी की पिंडके अलावा हनुमानजी, संतोष माता और भैरव बाबा मंदिर भी बना है।

ऐसे बदलती गया स्वरूप

मंदिर के व्यवस्थापक सुरेश महाजन ने बताया कि वर्तमान स्थिति में मंदिर हाईवे के बीच में रह गया। 70 साल पहले तक यह मंदिर सुभाष उत्कृष्ठ विद्यालय के मैदान में आता था, यहां पर रोडनहीं था। केवल आवागमन के लिए एक साइडका रोडथा, जो लालबाग-शनवारा के लिए था।लेकिन धीरे-धीरे इसकी तस्वीर बदलती गई। सुभाष स्कूल मैदान का दायरा कम कर रोडनिकाला गया।इस चक्कर में मंदिर दोनों रोडके बीच में आ गया।

यहां उतरती है मन्नतें

महाजन ने बताया कि शिवजी का प्राचीन मंदिर है।यहां पर अहिर समाज और सिंधी समाज के लोग अब भी अपने बच्चों की मन्नतें उतारने आते हैं।
शिवरात्रि
दूसरे दिन यहां भंडारा होता हैं और प्रत्येक गुरुवार को नि:शुल्क रूप से भोजन कराया जाता है।इसमें गरीब से लेकर अमीर तक भोजन प्रसादी लेते हैं।