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श्री गुरुनानकदेव ने बुरहानपुर में फैलाया था ज्ञान का प्रकाश

- नासिक से बुरहानपुर में आए थे श्री गुरुनानक देवजी यहां से ओंकारेश्वर और इंदौर की ओर किया प्रस्थान

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Shri Gurunanakdev had spread the light of knowledge in Burhanpur.

Shri Gurunanakdev had spread the light of knowledge in Burhanpur.

बुरहानपुर. महाराष्ट्र की सीमा से लगा मध्यप्रदेश का बुरहानपुर शहर सिख समाज के लिए ऐतिहासिक है। यहां सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देवजी महाराज और दसवें गुरु श्री गोविंद सिंहजी महाराज पहुंचे थे। श्री गुरुनानक देवजी बुरहानपुर में राजघाट ताप्ती नदी के किनारे ठहरे थे। यहां प्राचीन ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जहां गुरुनानकदेवजी की जयंती मनाई जा रही है।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अधीक्षक शैली कीर ने बताया कि सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देवजी मध्यप्रदेश में महाराष्ट्र के नासिक शहर से होते हुए बुरहानपुर पहुंचे थे। बुरहानपुर में वे ताप्ती नदी के किनारे ठहरे। यहां भक्तों में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। यहां की संगत को एकता अखंडता का पाठ पढ़ाकर छूआछूत से दूर रहकर अच्छी जीवन व्यतित करने की शिक्षा दी थी। यह बात 500 वर्ष पूर्व की है। इसके बाद यहां से वे ओंकारेश्वर होते हुए इंदौर गए।
कीर बताते हैं कि बुरहानपुर शहर भाग्यशाली है जहां सिख समाज के प्रथम श्री गुरुनानक देवजी और दसवें श्री गुरु गोविंद सिंहजी पधारे थे। गुरुओं के चरण कमल इस धरती पर पड़े। लोधीपुरा स्थित इस प्राचीन श्री गुरुद्वारा बड़ी संगत में हमेशा लंगर चलता रहता है। देश.विदेश से भक्त इस गुरुद्वारे में मत्था टेकने आते हैं।
तीन दिवसीय आयोजन शुरू
गुरुनानक देवजी का 554वां प्रकाशोत्सव मनाया जा रहा है। जहां ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकने श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रकाशोत्सव पर तीन दिवसीय कार्यक्रम में शनिवार को सुबह 11 बजे अखंड पाठ साहेब की आरंभता स्वर्गीय अमरीकसिंह कीर परिवार एवं बुरहानपुर की समस्त संगत की ओर से की गई। सोमवार को समाप्ति होगी। रविवार को सुबह कीर्तन का आयोजन हुआ।