
State's third steel utensil factory in Burhanpur
बुरहानपुर. पिता मजदूरी कर घर परिवार चला रहे थे, लॉकडाउन में जिस मिल में काम कर रहे थे वह भी बंद हो गई। मजबूरी में बुरहानपुर छोडऩा पड़ा और पिता काम की तलाश में मुंबई चले गए। यह हालात बने तो पिता ने बेटे से कहा था कि काम ऐसा करों की हम 50-100 मजदूरों को काम दे सके। बस यही बात जहन में भरी और आज बेटे ने खुद स्टील के बर्तन बनाने का कारखना खोलकर यहां मजदूरों को काम देकर खुद भी आत्मनिर्भर बन गया।
यह युवक है ग्राम बहादपुर निवासी पंकज नरेंद्र शाह। पंकज ने गांव में ही स्टील के बर्तन बनाने का कारखाना स्थापित कर 50 से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं। पंकज की इस उपलब्धि देख शुक्रवार को पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस ने भी उनका होसला बढ़ाया। चिटनीस ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में पंकज समाज के लिए प्रेरणा है।
मुंबई में पार्ट टाइम जॉब कर रहा था पंकज
पंकज शाह के पिता नरेंद्र मिल में मजदूरी करते थे, लेकिन मिल बंद होने के बाद वह परिवार को लेकर मुंबई चले गए। वहां मजदूरी करने लगे, पंकज भी पार्ट टाइम जॉब करता था। पंकज के पिता चाहते थे कि दूसरों को रोजगार देने वाला काम करों। अपने पिता की प्रेरणा से पंकज ने स्टील के बर्तन बनाने का कारखाना शुरू कर दिया। उन्होंने कारखाने में अनेक मशीने स्थापित की है। मध्यप्रदेश में पहला स्टील बनाने का कारखाना इंदौर, दूसरा भोपाल के मंडीदीप में है। अब तीसरा कारखाना पंकज द्वारा बुरहानपुर के ग्राम बहादरपुर में स्थापित किया है।
Published on:
21 May 2022 06:41 pm
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