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मुमताज की मौत के बाद एमपी में बन रहा था ताजमहल पर आ गया ये अड़ंगा

मुमताज की 392वीं पुण्यतिथि आज, आहुखाना में मुमताज को दफनाया, बुरहानपुर से जुड़ी है ताजमहल की यादें

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बुरहानपुर से जुड़ी है ताजमहल की यादें

बुरहानपुर. आगरा के ताजमहल को अनन्य प्रेम का स्मारक माना जाता है। मुगल शासक शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में इसे बनवाया था। ताजमहल की यादें बुरहानपुर से भी जुड़ी हैं। दरअसल पहले ताजमहल बुरहानपुर में ही बनाया जानेवाला था। मुमताज की मौत बुरहानपुर में ही हुई और यहीं उसे दफनाया भी गया। बुरहानपुर में ताजमहल बनाने की रूपरेखा तैयार हुई लेकिन एक अड़ंगा आ गया। इसके बाद ताजमहल आगरा में बनाया गया और मुमताज का ताबूत वहां ले जाया गया।

इतिहासकारों के मुताबिक मुमताज महल की सगाई 14 साल में ही शाहजहां के साथ कर दी गई थी। पांच साल बाद 10 मई सन् 1612 को शाहजहां और मुमताज का निकाह हो गया और मुमताज शाहजहां की तीसरी बेगम बनीं। बाद में वे शाहजहां की सबसे पसंदीदा बेगम बन गईं और दोनों पति पत्नी के प्रेम की दास्तां जहां—तहां सुनाई देने लगी।

सन् 1631 में शाहजहां मुमताज को लेकर बुरहानपुर आ गए। उस वक्त मुमताज गर्भवती थीं व चौदहवीं संतान को जन्म देने वाली थीं। मुमताज ने यहीं दम तोड़ दिया। यहीं छह माह तक आहुखाना में बने पाइबाग में मुमताज को दफनाया गया था। मुमताज को बेहद सुरक्षित ताबूत में रखा गया था।

अपनी पसंदीदा बेगम के यूं अचानक चले जाने से शाहजहां दुखी हो उठा। उसने मुमताज महल की याद में एक भव्य स्मारक बनाने की ठानी और ताजमहल की रूपरेखा तैयार हुई। इसे पहले बुरहानपुर में ही बनाया जाना था लेकिन एक दिक्कत सामने आ गई। दरअसल बुरहानपुर की मिट्टी ताजमहल जैसी धरोहर के लिए उपयुक्त नहीं पाई गई थी। इसलिए शाहजहां ने मजबूरी में ताजमहल के लिए आगरा को चुना।

आगरा के ताजमहज में 32 प्रकार के बेशकीमती पत्थर लगे हैं। इनमें से एक पत्थर बुरहानपुर की खदान का भी है लेकिन समय के साथ यह खदान भी विलुप्त हो गई। जहां की खदान का पत्थर ताजमहल में लगाया गया वह स्थान अब महाराष्ट्र के रावेर में है।

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