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कपड़ा उद्योग को लगा कोरोना वायरस, उत्पादन घटा, कम मजदूरी में करने की मजबूरी

- ३१ तक रहेगा भारी असर- ५० फीसदी से अधिक लूम पड़े ठप

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 Textile industry felt corona virus, production reduced, helplessness in low wages

Textile industry felt corona virus, production reduced, helplessness in low wages

बुरहानपुर. कोरोना वायरस का शहर की धड़कन कहे जाने वाले पावरलूम उद्योग पर भी पड़ गया। डिमांड न होने से कपड़े का उत्पादन घट गया हैं। कपड़़े उद्योग पर मंदी का असर होने से बुनकरों और मजदूरों के सामने परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो गया। जो कपड़ा बनाने के लिए मिल भी रहा हैं, तो उसकी मजदूरी घट गई। 50 प्रतिशत कपड़ा तक उत्पादन घटा है।
कोरोना वायरस के कारण शेयर बाजार में करोड़ो रुपए नुकसान के बाद बड़े व्यापारी कपड़ा नहीं खरीद रहे हैं। पावरलूम कारखानों के साथ ही साइजिंग प्रोसेस भी प्रभावित हो रहे हैं। ३५ हजार पावरलूम मशीनों पर बुरहानपुर में तैयार होने वाले कपड़े की डिमांड कम होने से उत्पादन भी कम हो गया। मास्टर विवर्स की ओर से बुनकरों को कच्चा माल कम ही उपलब्ध कराया जा रहा हैं, क्योंकि मांग ऊपर से ही कम हो गई। ऐसे में बुनकरों की मजदूरी पर भी असर पड़ा। १०० मीटर की मजदूरी देकर ११० मीटर तक कपड़ा तैयार कराया जा रहा हैं। पावरलूम कारखानों को तो कम मजबूरी के कारण बिजली बिल भरना भारी पड़ रहा है। जबकि कइयों को तो कच्चा माल नहीं मिलने से पूरी तरह लूम बंद पड़े हैं।
यहां रहती है कपड़े की डिमांड
बुरहानपुर का कपड़ा मुंबई, कलकत्ता, दिल्ली, पाली, बलोतरा, जेतपुर असाम, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेशों में पहुंचता है। कोरोना वायरस के चलते माल की मंाग प्रभावित हुई है। कम मजदूरी लेने ही कच्चा माल दिया जा रहा हैं।
बुनकरों पर संकट, कम मजदूरी पर तैयार करा रहा कपड़ा
पावरलूम बुनकर संघ अध्यक्ष रियाज अहमद अंसारी ने कहा कि पावरलूम उद्योग शहर की आर्थिक नींव है। हजारों मजदूरों के घर चलते हंै। मास्टर विवर्स और बुनकरों के बीच २४ रुपए ५० पैसे प्रति पीक मजदूरी तय हुई थी। लेकिन बुनकरों को २२ और २३ रुपए ही मजदूरी दी जा रही हैं। पिछले एक साल से बुनकरों का शोषण हो रहा हैं। शासन ने अब तक बुनकरों के बिजली बिल के रेट कम नहीं किए। शिकायत करने पर मास्टर विवर्स बुनकरों को कच्चा माल देना बंद कर देते हैं। मास्टर विवर्स से तय मजदूरी नहीं मिलने पर अब प्रशासन और मास्टर विवर्स एसोसिएशन को शिकायत की जाएगी। बुनकरों को तय मजदूरी नहीं मिलने पर आगे की राणनीति तैयार होगी।
शहर में पॉवरलूम उद्योग की स्थिति
५० हजार पावरलूम शहर में
30 लाख मीटर कपड़े का उत्पादन प्रतिमाह
70 हजार मजदूर जुड़े है पावरलूम से
२ साल साल से कपड़ा बाजार में जीएसटी से मंदी
५० प्रतिशत कोरोना वायरस से और पड़ा असर
कोरोना वायरस के चलते बाजार में कपड़े की डिमांड नहीं होने के कारण उत्पादन कम हुआ है। बुनकरों को चार्ट के अनुसार मजदूरी दी जा रही हैं। कम मजदूरी मिलने की शिकायत अब तक नहीं मिली हैं।
कन्हैया मित्तल, मास्टर विवर्स एसोसिएशन